तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में दिया धरना
धीरज वैभव
- 27 Jun 2024, 05:29 PM
- Updated: 05:29 PM
कोलकाता, 27 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के दो नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण समारोह स्थल को लेकर जारी विवाद के कारण शपथ नहीं ले पाने के एक दिन बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में बृहस्पतिवार को धरना दिया।
राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने इन दोनों विधायकों को राजभवन में शपथ लेने को कहा था जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।
बारानगर से निर्वाचित विधायक सायंतिका बंदोपाध्याय और भगबानगोला से निर्वाचित हुए रायत हुसैन सरकार विधानसभा परिसर में बी आर आंबेडकर की प्रतिमा के सामने बैठ गए और उन्होंने मांग की कि राज्यपाल बोस विधानसभा के अंदर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कराकर उन्हें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कर्तव्य का निर्वहन करने दें।
राज्यपाल ने हाल में हुए उपचुनावों में निर्वाचित दोनों विधायकों को बुधवार को राजभवन में शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया कि परंपरा के अनुसार उपचुनाव जीतने वाले उम्मीदवार के मामले में राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को शपथ दिलाने का काम सौंपते हैं।
राज्यपाल ने विधानसभा में शपथ दिलाने से इनकार कर दिया और नयी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
बंदोपाध्याय ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने बुधवार को शाम चार बजे तक राज्यपाल द्वारा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का इंतजार किया लेकिन वह नहीं आए। आज हम आंबेडकर की प्रतिमा के सामने इस मांग के पक्ष में बैठे हैं कि लोगों के लिए काम करने का हमारा संवैधानिक अधिकार बिना किसी देरी के हमें दिया जाए।’’
विधायकों का धरना अपराह्न साढ़े बारह बजे शुरू हुआ और शाम चार बजे तक जारी रहा।
धरना समाप्त होने के बाद बंदोपाध्याय ने कहा कि वह विधानसभा में शपथ दिलाने के लिए फिर से राज्यपाल को पत्र लिखेंगी।
सरकार ने कहा कि वह निर्वाचित होने के बावजूद लोगों के लिए काम नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें सदन के सदस्य के रूप में शपथ नहीं दिलाई गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हम काम नहीं कर पा रहे हैं और अहम समय बर्बाद हो रहा है। राज्यपाल क्यों नहीं यहां आकर शपथ दिला रहे हैं?’’
विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस गतिरोध को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए राज्यपाल बोस पर शपथ ग्रहण समारोह को ‘‘अहंकार की लड़ाई’’ में बदलने और जानबूझकर मुद्दे को जटिल बनाने का आरोप लगाया।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बोस ने बुधवार रात को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि संविधान उन्हें यह निर्णय लेने का अधिकार देता है कि विधायकों को शपथ दिलाने का काम किसे सौंपा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विधानसभा में शपथ ग्रहण कार्यक्रम कराने में कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन अध्यक्ष के आपत्तिजनक पत्र के कारण राज्यपाल के पद की गरिमा को ठेस पहुंची, इसलिए यह विकल्प व्यवहार्य नहीं पाया गया।’’
भाषा धीरज