उज्जैन 'समय गणना का मूल केंद्र', 'महाकाल मानक समय' लागू करने का वक्त : धर्मेंद्र प्रधान
सं, दिमो रवि कांत
- 03 Apr 2026, 09:23 PM
- Updated: 09:23 PM
उज्जैन (मप्र), तीन अप्रैल (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि 'ग्रीनविच मीन टाइम' (जीएमटी) के स्थान पर 'महाकाल मानक समय' (एमएसटी) स्थापित करने का समय आ गया है, क्योंकि मध्यप्रदेश का उज्जैन ''समय गणना का मूल केंद्र'' रहा है।
प्रधान ने तीन दिवसीय 'महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन' के उद्घाटन अवसर पर कहा कि उज्जैन, काशी, कांची और पुरी धाम जैसे भारत के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र ''जीवंत प्रयोगशालाएं'' हैं, जहां विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा, ''उज्जैन वह स्थान है जहां भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का संगम होता है तथा प्राचीन काल में विश्व की समय गणना यहीं से की जाती थी। इसलिए अब तार्किक रूप से 'ग्रीनविच मीन टाइम' के स्थान पर 'महाकाल मानक समय' स्थापित करने का समय आ गया है। आधुनिक एआई उपकरण भी यह मानते हैं कि समय गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र रहा है।''
उन्होंने कहा कि भारत के वैज्ञानिक गौरव को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है और इस दिशा में उज्जैन के विज्ञान केंद्र एवं तारामंडल को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधान ने कहा कि उज्जैन एक ऐसा स्थान है जहां अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और एक नयी दृष्टि का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान, अध्यात्म के बिना अधूरा है।
उन्होंने महाकाल मंदिर में होने वाली एक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वैशाख माह के प्रथम दिन से भगवान शिव पर मिट्टी के पात्र से निरंतर जलाभिषेक केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गर्मी और पर्यावरण प्रबंधन की वैज्ञानिक समझ का उदाहरण है।
उन्होंने कहा, ''यह दर्शाता है कि हमारे समाज में सदियों से समय की गणना और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने की वैज्ञानिक समझ रही है। पर्यावरणीय जिम्मेदारी और संतुलित जीवन भारतीय ज्ञान परंपरा के केंद्र में रहे हैं।''
प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि रटने की बजाय सृजनात्मकता, डिजाइन बनाने और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और वैज्ञानिक सोच के इस दौर में छात्रों को पीछे न रहने देने के लिए स्कूल स्तर पर एआई जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक भाषा का ज्ञान पर एकाधिकार नहीं हो सकता, इसलिए शिक्षा को भारतीय भाषाओं और लोक संस्कृतियों से जोड़ा जा रहा है ताकि छात्र अपनी मातृभाषा में जटिल वैज्ञानिक विषयों को आसानी से समझ सकें।
इस अवसर पर प्रधान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'विद्यार्थी विज्ञान मंथन' की वेबसाइट, पुस्तिका और विवरण पुस्तिका का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में इस बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि 'सूर्य सिद्धांत' जैसे ग्रंथों के माध्यम से हमारे पूर्वजों ने समय और अंतरिक्ष के गहरे संबंध को स्थापित किया।
उन्होंने दावा किया कि सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित भारतीय समय मापन प्रणाली, ग्रहों की गति और पृथ्वी के घूर्णन के साथ सटीक तालमेल बैठाती है और 'ग्रीनविच मीन टाइम' से अधिक सटीक है।
यादव ने कहा कि कर्क रेखा और शून्य देशांतर के संगम के कारण उज्जैन समय गणना का वैश्विक केंद्र रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को धार्मिक नगरी के साथ-साथ 'विज्ञान नगरी' के रूप में भी विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि 15 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया जा चुका है तथा सिंहस्थ-2028 के आयोजन की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''सिंहस्थ दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मेला है, जिसमें लगभग 35 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।''
उन्होंने बताया कि सिंहस्थ की तैयारियों के तहत 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बायपास का भूमिपूजन किया जा चुका है, जिससे उज्जैन के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाला शहर बनाया जा सकेगा।
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सं, दिमो रवि कांत
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