दिल्ली सरकार ने 'वायु प्रदूषण शमन कार्य योजना' जारी की
सुरेश
- 03 Apr 2026, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने शुक्रवार को 'वायु प्रदूषण शमन कार्य योजना' जारी की, जिसके तहत बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र के ईंधन न देने (नो पीयूसी-नो फ्यूल) को कड़ाई से लागू किया जाएगा, केंद्रीयकृत हरित वॉर रूम और एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित किया जाएगा तथा वार्ड स्तर पर 'वायु रक्षक' टीमें तैनात की जाएंगी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
बयान के मुताबिक, सर्दियों में सिर्फ बीएस-छह, सीएनजी या इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को ही राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति होगी तथा शहर में यातायात जाम की समस्या हल करने के लिए 62 अहम बिंदुओं की पहचान की गई है, जहां समयबद्ध सुधार किया जाएगा। इसके अलावा, वायु प्रदूषण में अहम योगदान देने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए 'वाटर स्प्रिंकलर' और 'एंटी-स्मॉग गन' जैसी मशीनों की बड़े पैमाने पर तैनाती की जा रही है और सड़कों पर 'मिस्ट स्प्रे' सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण शमन कार्य योजना- 2026 में स्वच्छ, हरित और सतत शहरी विकास के विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कदम शामिल है।
बयान के अनुसार, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को उनके आधिकारिक आवास पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, डॉ. पंकज कुमार सिंह, मुख्य सचिव राजीव वर्मा तथा दिल्ली मेट्रो रेल निगम, यातायात पुलिस और सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के 'हरित बजट' के जरिये दिल्ली सरकार ने साफ हवा और पर्यावरण को अपनी प्राथमिकता बनाया है और बजट में स्वच्छ परिवहन, धूल पर नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण की निगरानी के लिए पर्याप्त धन दिया गया है।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण शमन कार्य योजना इन्हीं पहल को तय समय में और पूरी जिम्मेदारी के साथ लागू करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्य योजना प्रदूषण के बड़े कारणों जैसे वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, फैक्टरियों का प्रदूषण और कचरा या बायोमास जलाने को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि कार्य योजना में 11 अहम क्षेत्रों पर काम किया जाएगा और अलग-अलग विभाग मिलकर इसे लागू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हर काम के लिए समय-सीमा एवं जिम्मेदारी तय है तथा वास्तविक समय में निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वाहन से होने वाले प्रदूषण पर सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है और इस मामले में बिल्कुल भी ढील नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा, "...'नो पीयूसी-नो फ्यूल' नियम को कड़ाई से लागू किया जा रहा है, जिसके लिए एएनपीआर कैमरे और डिजिटल प्रणालियां लगाई जा रही हैं। एक नवंबर 2026 से बीएस-छह, सीएनजी या इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी और गैर-जरूरी यातायात को भी नियंत्रित किया जाएगा।"
उन्होंने बताया कि जब प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ेगा, दफ्तरों के समय में बदलाव, घर से काम करने की सुविधा और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अतिरिक्त रोक जैसे कदम उठाने पर भी विचार किया जाएगा।
बयान में कहा गया है कि शहर में जाम की समस्या को कम करने के लिए 62 प्रमुख बिंदुओं पर समयबद्ध सुधार कार्य किए जा रहे हैं और एक शहरव्यापी 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' लागू किया जा रहा है।
इसके मुताबिक, प्रदूषण में अहम कारक 'सड़क की धूल' को नियंत्रण के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन (एमआरएसएम), वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन जैसी मशीनों की बड़े पैमाने पर तैनाती की जा रही है तथा सड़कों पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जा रहे हैं और बड़े भवनों में इसे अनिवार्य किया गया है।
बयान में कहा गया है कि बायोमास जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है, जिसके तहत इलेक्ट्रिक हीटर वितरण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "पर्यावरणीय प्रशासन को मजबूत करने के लिए वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है और एक केंद्रीकृत हरित वॉर रूम तथा एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित किया जा रहा है। वार्ड स्तर पर 'वायु रक्षक' टीमें तैनात की जाएंगी.. ताकि वास्तविक समय में निगरानी रखी जा सके तथा त्वारित कार्रवाई की जा सके।"
उन्होंने यह भी कहा कि हरित दिल्ली का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वर्ष 2026-27 में 70 लाख पेड़, झाड़ियां और बांस लगाए जाएंगे, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य एक करोड़ से अधिक पौधारोपण का है।
भाषा नोमान नोमान सुरेश
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