पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान : इक्रा
अजय
- 30 Mar 2026, 07:17 PM
- Updated: 07:17 PM
नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर ऊंची ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा उपलब्धता को लेकर बनी चिंताओं से वित्त वर्ष 2026-27 में घटकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है, जिसके चालू वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सोमवार को यह बात कही।
इक्रा के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने के आसार हैं।
रेटिंग एजेंसी ने साथ ही कहा कि भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी का 1.7 प्रतिशत हो सकता है जबकि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में यह लगभग एक प्रतिशत रह सकता है।
इक्रा के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से महंगाई बढ़ने का जोखिम है, जो परिवारों की मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाओं को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ बढ़ती अनिश्चितता निकट अवधि में उपभोक्ता धारणा को कमजोर कर सकती है।
रिपोर्ट कहती है कि जनवरी–फरवरी, 2026 में अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाने वाले आंकड़े फिलहाल सकारात्मक दिख रहे हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि को लेकर बनी अनिश्चितता भारत जैसे देशों के अल्पकालिक व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर दबाव डाल सकती है क्योंकि देश कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस तथा उर्वरक जैसे उत्पादों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।
इक्रा ने कहा कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण विभिन्न क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और इससे भारतीय कंपनियों की लाभप्रदता भी प्रभावित हो सकती है।
एजेंसी ने कहा, '' ऊंची ऊर्जा कीमतों एवं इसकी उपलब्धता को लेकर चिंताओं के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, शुल्क से जुड़े घटनाक्रम, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी, नीतिगत दरों में कटौती, खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी और कृषि क्षेत्र के सकारात्मक रुझान खपत को समर्थन दे सकते हैं।''
इक्रा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में वृद्धि की आशंका के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) पूरे वित्त वर्ष में नीतिगत दरों में लंबा विराम बनाए रख सकती है, भले ही जीडीपी वृद्धि में कुछ नरमी आए।
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, हालांकि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान नकदी प्रबंधन के मोर्चे पर हस्तक्षेप जारी रख सकता है।
भाषा निहारिका अजय
अजय
3003 1917 दिल्ली