रेल पटरी रखरखाव कर्मियों की यूनियन ने पेयजल ठंडा रखने वाली बोतल नहीं मिलने का आरोप लगाया
सुभाष नेत्रपाल
- 26 Jun 2024, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) ‘ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स यूनियन’ ने दावा किया है कि रेल पटरियों का रखरखाव करने वाले लाखों कर्मियों को दो लीटर की ‘इंसुलेटेड’ पानी बोतल अभी तक नहीं मिली हैं, जबकि रेल मंत्रालय ने इस बारे में 17 जोन को अप्रैल में निर्देश दिया था और एक महीने बाद इसका स्मरण भी दिलाया था।
यूनियन ने आरोप लगाया कि कुछ मंडलों में, जहां ‘इंसुलेटेड’ बोतल का वितरण शुरू कर दिया गया है वहां बोतल ‘‘खराब गुणवत्ता’’ की हैं।
‘इंसुलेटेड’ बोतल में पानी को काफी देर तक ठंडा रखा जा सकता है।
चार लाख से अधिक रेल पटरी रखरखाव कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन के अनुसार, पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर मध्य, मध्य और पश्चिम मध्य जैसे क्षेत्रों के विभिन्न रेल मंडलों ने अब तक इसकी वितरण प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
यूनियन के पश्चिमी रेलवे महासचिव सतीश यादव ने कहा, ‘‘पश्चिमी क्षेत्र में वितरण प्रक्रिया अभी शुरू होनी बाकी है।’’
यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामनरेश पासवान ने कहा कि मध्य रेलवे ने भी पटरियों का रखरखाव करने वालों को पानी की बोतल वितरित नहीं की है।
उन्होंने कहा कि ये लोग कुओं, पास के तालाबों और ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध अन्य जल स्रोतों से पानी लेते हैं और उनमें से कई अस्वास्थ्यकर एवं दूषित पानी पीने के कारण बीमार पड़ जाते हैं।
पासवान ने कहा, ‘‘रेलवे उन लोगों को साफ पेयजल मुहैया कराने में नाकाम रहा है जो प्रतिदिन लाखों यात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।’’
उनके अनुसार, इंसुलेटेड बोतल वितरित करने का उद्देश्य भीषण गर्मी के दौरान इन कर्मियों के शरीर में जल की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना है।
पासवान ने कहा कि रेल मंत्रालय ने इस संबंध में सभी मंडलों को नौ अप्रैल को एक निर्देश जारी किया था और 20 मई को इसका स्मरण भी कराया था, लेकिन इसके बावजूद बहुत कम मंडलों ने इस दिशा में पहल की और उनमें से अधिकतर ने अभी तक रेलवे बोर्ड के परामर्श का पालन नहीं किया है।
यूनियन के पूर्वोत्तर रेलवे महासचिव राकेश वर्मा ने कहा कि उनके मंडल में इन बोतलों का वितरण महज 20 दिन पहले शुरू हुआ है और वह भी सिर्फ लखनऊ मंडल में।
वर्मा ने कहा, ‘‘दो अन्य मंडलों - इज्जतनगर और वाराणसी में वितरण अभी शुरू होना बाकी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लखनऊ मंडल में भी हमें जो बोतलें दी गई हैं, वे घटिया गुणवत्ता की हैं, जो पानी को एक या दो घंटे से ज्यादा ठंडा नहीं रख सकतीं।’’
यादव के अनुसार, ‘‘अब मानसून भी आने वाला है और देश के कई हिस्सों में गर्मी कम हो गई है। लेकिन कई मंडलों में इंसुलेटेड बोतलें वितरित नहीं की गई हैं।’’
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि रेल पटरियों का रखरखाव करने वाले कर्मी रेलगाड़ियों के सुरक्षित परिचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे चौबीसों घंटे पटरियों की स्थिति पर नजर रखते हैं, लेकिन सरकार उन्हें उपयुक्त सुविधाएं प्रदान करने के अपने वादे में अकसर विफल रहती है।
यादव ने कहा, ‘‘सर्दी खत्म होने पर हमें ठंड से बचाव करने वाली पोशाक मिलती है। रेल मंत्रालय को यह एहसास नहीं है कि उसकी लापरवाही हमारे जीवन को कितना कठिन और चुनौतीपूर्ण बना देती है। 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट वाला मंत्रालय हमें इतनी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान नहीं कर सकता है जबकि हम सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम करते हैं।’’
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