जयशंकर ने म्यांमा के अपने समकक्ष से मुलाकात की, भारत की सीमा पर हिंसा को लेकर जताई चिंता
धीरज प्रशांत
- 26 Jun 2024, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने म्यांमा के अपने समकक्ष यू थान श्वे से बुधवार को हुई मुलाकात के दौरान पड़ोसी देश में हिंसा एवं अस्थिरता का असर भारतीय सीमा पर पड़ने को लेकर भारत की ‘गहरी चिंता’ साझा की और म्यावाडी शहर में फंसे भारतीयों को यथाशीघ्र वापस लाने में सहयोग की मांग की।
जयशंकर ने थान श्वे से नयी दिल्ली में मुलाकात की, जो अपनी एक विदेश यात्रा के बाद म्यांमा लौट रहे थे और दिल्ली रुके हुए थे। वह म्यांमा के उपप्रधानमंत्री भी हैं। म्यांमा में एक फरवरी 2021 में तख्ता पलट के बाद शासन पर सैन्य जुंटा का कब्जा होने के बाद पड़ोसी देश के वरिष्ठ नेता से भारत के विदेशमंत्री की यह पहली सार्वजनिक मुलाकात है।
मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने म्यांमा में भारत की चल रही परियोजनाओं की ‘विश्वसनीय सुरक्षा’ के लिए जोर दिया और पड़ोसी देश के लोकतांत्रिक पथ पर यथाशीघ्र लौटने का आह्वान किया।
जयशंकर ने पड़ोसी देश में जारी हिंसा और अस्थिरता का भारत-म्यांमा सीमा पर विशेष रूप से होने वाले असर को रेखांकित किया।
म्यांमा के कई हिस्सों में सैन्य जुंटा और विद्रोही बलों के बीच लड़ाई चल रही है। विद्रोही बलों ने पहले ही कई शहरों पर कब्जा कर लिया है। जुंटा-रोधी (सैन्य शासन विरोधी) बलों ने अप्रैल में कई सैन्य ठिकानों और म्यावाडी के कमान केंद्र पर कब्जा कर लिया था।
जयशंकर ने बैठक में थान श्वे को यह भी बताया कि भारत, म्यांमा की स्थिति से निपटने के लिए सभी हितधारकों के साथ बातचीत को तैयार है।
जयशंकर ने पोस्ट किया, ‘‘म्यांमा के उपप्रधानमंत्री-सह-विदेश मंत्री यू थान श्वे के आज नयी दिल्ली पहुंचने पर उनसे मुलाकात की। इस दौरान हमारी सीमा से लगते म्यांमा में जारी हिंसा और अस्थिरता के प्रभाव को लेकर हमारी गहरी चिंता पर चर्चा हुई। भारत इस स्थिति से निपटने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘(मैंने) प्राथमिकता वाली चुनौतियों को उठाया, खासतौर पर अवैध मादक पदार्थ, हथियारों की तस्करी और मानव तस्करी। म्यावाडी में फंसे भारतीय नागरिकों की यथाशीघ्र वापसी के लिए सहयोग भी मांगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘म्यांमा में चल रही हमारी परियोजनाओं के लिए विश्वसनीय सुरक्षा की मांग की गई। म्यांमा से लोकतांत्रिक परिवर्तन के रास्ते पर शीघ्र लौटने का आग्रह किया गया। भारत किसी भी तरह से मदद के लिए तैयार है।’’
करीब तीन सप्ताह पहले म्यांमा स्थित भारतीय दूतावास ने देश में नौकरी की तलाश कर रहे भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी थी ताकि वे फर्जी या अवैध रोजगार के झांसे में न आए।
दूतावास द्वारा जारी परामर्श में कहा गया कि म्यांमा-थाईलैंड की सीमा से लगे म्यावाडी इलाके में अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोह सक्रिय हैं और भारतीयों से इलाके में नौकरी की पेशकश को स्वीकार करने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी।
माना जा रहा है कि नौकरी घोटाले के झांसे में आकर करीब 100 भारतीय म्यावाडी इलाके में फंसे हुए हैं।
म्यांमा में सेना द्वारा तख्तापलट के बाद से लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर व्यापक हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
विद्रोही बलों ने पहले ही भारत, चीन और बांग्लादेश की सीमाओं पर कई प्रमुख व्यापारिक बिंदुओं पर कब्जा कर लिया है।
म्यांमा, भारत का रणनीतिक पड़ोसी है और दोनों देश करीब 1640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं जो उग्रवाद प्रभावित भारत के नगालैंड और मणिपुर राज्य से गुजरती है।
म्यांमा के सीमावर्ती इलाकों में हिंसा और अस्थिरता के मद्देनजर इस साल जनवरी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सीमा पर बाड़ लगाने की घोषणा की थी।
भाषा धीरज