आर्थिक स्थिरीकरण कोष की मदद से वैश्विक चुनौतियों से निपटेगी सरकार: सीतारमण
अविनाश
- 13 Mar 2026, 08:08 PM
- Updated: 08:08 PM
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष (इकोनॉमिक स्टेबिलाइज़ेशन फंड) सरकारी योजनाओं को पटरी से उतारे बिना पश्चिम एशिया संकट जैसी स्थिति में देश को आर्थिक झटकों को सहन करने में मदद करेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह कोष पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट जैसी आकस्मिक वैश्विक चुनौतियों से लगने वाले झटकों को झेलने के लिए एक 'बफर' के तौर पर काम करेगा।
उन्होंने कहा, ''एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष भारत को वैश्विक मुश्किलों का सामना करने के लिए वित्तीय सुदृढ़ता देगा।'' उन्होंने कहा कि यह कोष हालिया संकट जैसी स्थितियों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आने पर सरकारी योजनाओं को पटरी से उतारे बिना विभिन्न तरह के आर्थिक झटकों को सहन करने में मदद करेगा।
वित्त मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट और देश में एलपीजी की कथित कमी को लेकर सदन में शोरगुल कर रहे विपक्षी सदस्यों पर प्रहार करते हुए कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब मैं अप्रत्याशित वैश्विक स्थिति, आपूर्ति श्रृंखला और एलपीजी (संकट) पर बात कर रही हूं तो वे जवाब सुनने को तैयार नहीं हैं। इसके बजाय वे अपना एजेंडा चला रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि विपक्ष आसन के करीब आकर हंगामा कर रहा है, यह देश का दुर्भाग्य है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्य राष्ट्र हित में एकजुट होने और नागरिकों को विश्वास दिलाने के बजाय ''गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार'' कर रहे हैं।
सीतारमण ने कहा, ''क्या विपक्ष आपात स्थिति के लिए कोई कोष सृजित नहीं करना चाहता? हम सभी को पार्टी हित से ऊपर उठते हुए एक साथ आकर जनता के हित में बात करने की जरूरत है।''
अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच के जरिए, सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में 2.81 लाख करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय के लिए लोकसभा से मंजूरी मांगी थी। चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्राप्तियों के साथ, कुल अतिरिक्त नकदी व्यय 2.01 लाख करोड़ रुपये होगा।
मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विपक्ष के शोरगुल के बीच अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच सहित अन्य विनियोग विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। शोरगुल नहीं थमने पर पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सदन की कार्यवाही अपराह्न तीन बजकर चार मिनट पर दिन भर के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमानों (आरई) के भीतर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त व्यय से वित्त वर्ष 2025-26 के राजकोषीय घाटे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो संशोधित अनुमानों (आरई) के दायरे में ही रहेगा।
एलपीजी की कमी की चिंताओं को लेकर विपक्ष की नारेबाजी के बीच, सीतारमण ने कहा, ''अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच के कारण 2025-26 के अनुमानित बजट से परे व्यय में कोई वृद्धि नहीं होगी।''
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी और अनुदान की अनुपूरक मांगों में इसका पूरा ध्यान रखा गया है और इस बार किसानों को 26 प्रतिशत अधिक उवर्रक सब्सिडी दी जा रही है।
चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों द्वारा देश में उर्वरक की कमी का दावा किये जाने पर वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि खरीफ फसलों के लिए देश में उर्वरक का पूरा भंडार है, ''और दिसंबर 2026 रबी फसल सत्र के लिए हम अभी ही प्रावधान कर रहे हैं।''
सीतारमण ने कहा कि पूर्व सैनिकों के लिए इस अनुपूरक मांग में करीब साढ़े छह हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है और इस तरह पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के लिए कुल आवंटन 2025-26 के लिए 31 मार्च तक करीब साढ़े 14 हजार करोड़ रुपये है।
इस बीच, कुछ सदस्यों के सत्तापक्ष की सीट के नजदीक पहुंच जाने पर सीतारमण ने कहा कि यदि संसद इसे पारित नहीं करेगी तो यह जारी कैसे होगा।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ''बिना सोचे-समझे बात करने वाले नेता प्रतिपक्ष और अन्य विपक्षी सदस्यों को थोड़ा पढ़ने के बाद सवाल पूछना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) को 3,000 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।
सीतारमण ने अनुपूरक मांग को उपयोगी करार देते हुए, विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि बजट में कुछ गलत आकलन किये जाने के कारण इसे लाया गया है।
उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि अनुदान के लिए अनुपूरक मांगें लाना सरकार की ''खराब बजट व्यवस्था'' को दर्शाता है, सीतारमण ने कहा कि यह तर्क ''त्रुटिपूर्ण तर्क'' पर आधारित है।
वित्त मंत्री ने कहा, ''ऐसा नहीं है कि बजट में कुछ गलत आकलन किया गया था, जिस कारण इसे लाया गया है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में अनुदान की अनुपूरक मांगों को एक या अधिक से अधिक दो बार ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है।
सीतारमण ने कहा कि 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना के तहत 2026-27 के लिए 95,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच में, 31 मार्च 2026 तक मनरेगा के बकाया का भुगतान करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मनरेगा की निधि में कटौती करने का आरोप लगाया था, ''पता नहीं, मैं (अपने) गुस्से को कैसे कम करूं।''
भाषा
सुभाष अविनाश
अविनाश
1303 2008 संसद