वकील की हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार
संतोष प्रशांत
- 25 Jun 2024, 11:08 PM
- Updated: 11:08 PM
श्रीनगर, 25 जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मियां कयूम को 2020 में एक वकील बाबर कादरी की हत्या की साजिश में उनकी कथित संलिप्तता के लिए मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े कयूम को जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) द्वारा उनके खिलाफ सबूत एकत्र किये जाने के बाद हिरासत में ले लिया गया।
टेलीविजन बहसों में अक्सर दिखाई देने वाले मानवाधिकार विशेषज्ञ कादरी को सितंबर 2020 में शहर के हवाल इलाके में उनके आवास पर गोली मार दी गई थी। वर्ष 2018 में भी उनकी हत्या का प्रयास किया गया था लेकिन तब वह बाल-बाल बच गए थे।
अधिकारियों ने कहा कि कादरी की हत्या इस बात का प्रमाण है कि बार एसोसिएशन के भीतर असंतोष से गोलियों से निपटा जाता था। मारे गए वकील ने सोशल मीडिया पर अपने विभिन्न भाषणों और पोस्ट में कयूम की वैधता और भूमिका पर सवाल उठाया था।
कादरी ने 24 सितंबर, 2020 को अपनी हत्या के दिन एक वीडियो में आरोप लगाया कि कयूम ने आतंकवादी धमकियों का इस्तेमाल किया और अपने प्रतिद्वंद्वियों को बार एसोसिएशन चुनावों से हटने के लिए मजबूर किया।
अधिकारियों ने कहा कि उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन में सेवा देकर कानूनी समुदाय में प्रमुखता हासिल करने वाले कयूम इस पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए धमकी, विरोध और हिंसा का इस्तेमाल करने का आरोप है।
अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान, कयूम का नाम हत्या की साजिश के प्राथमिक संदिग्ध के रूप में उभरा।
एक अधिकारी ने यहां कहा, ‘‘कादरी की हत्या के सिलसिले में कश्मीर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता मियां कयूम को गिरफ्तार किया गया है।’’
उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें जम्मू स्थानांतरित कर दिया गया जहां उन्हें बुधवार को एक निर्दिष्ट अदालत में पेश किया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने जनवरी में मामले को श्रीनगर से जम्मू की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।
उच्च न्यायालय का आदेश एसआईए द्वारा दायर एक आवेदन पर आया, जिसमें कहा गया था कि श्रीनगर स्थित कुछ प्रभावशाली वकीलों की संलिप्तता के कारण श्रीनगर का कोई भी वकील कानूनी सहायता प्रदान करने को तैयार नहीं था।
श्रीनगर पुलिस ने सबसे पहले 2021 में विशेष यूएपीए कोर्ट, श्रीनगर में छह आरोपियों के खिलाफ मामले में आरोप पत्र दायर किया था।
अगस्त 2022 में पुलिस ने चल रही जांच के हिस्से के तहत श्रीनगर में कयूम और दो अन्य वकीलों के आवासों की तलाशी ली और विभिन्न डिजिटल डिवाइस, बैंक खातों के विवरण और दस्तावेज जब्त किए।
एसआईए ने पिछले साल सितंबर में कादरी की हत्या की गुत्थी सुलझाने वाली कोई भी जानकारी देने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।
अधिकारियों ने कहा, ‘‘मामले की जांच के दौरान पता चला कि कयूम मामले के मुख्य षडयंत्रकर्ता थे और कादरी की हत्या में उनका हाथ था।’’
अधिकारियों ने बताया कि कयूम से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है।
कयूम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी के ससुर हैं।
कादरी, बार एसोसिएशन के नेताओं, खासकर कयूम के कटु आलोचक थे और हत्या की घटना से तीन दिन पहले उन्होंने (कादरी) दावा किया था कि उनकी जान को खतरा है।
पुलिस ने कादरी की हत्या में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर साकिब मंजूर के शामिल होने का आरोप लगाया था। मंजूर 2022 में एक अन्य आतंकवादी कमांडर के साथ श्रीनगर में एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारा गया था।
कयूम कथित तौर पर मंदिर की जमीन हड़पने समेत कई मामलों में जांच का सामना कर रहा है। उसे पांच आपराधिक मामलों में आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
अपने पूरे करिअर के दौरान कयूम कश्मीर के पाकिस्तान में विलय का मुखर समर्थक रहा और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए धमकी, विरोध और हिंसा जैसी रणनीति का इस्तेमाल करता रहा।
चुनावों का बहिष्कार करने से लेकर आतंकवाद का खुलेआम समर्थन करने तक, कयूम ने लगातार अलगाववादी विचारधारा को आगे बढ़ाया और विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया तथा भारत सरकार के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए।
भाषा संतोष