कांग्रेस के शासनकाल में हरियाणा में किसानों का शोषण होता था : भाजपा सांसद
माधव
- 11 Mar 2026, 06:27 PM
- Updated: 06:27 PM
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में हरियाणा में किसानों का शोषण होता था और औने-पौने दाम पर उनसे जमीन लेकर करोड़ों रूपये का लाभ कमाया जाता था।
भाजपा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा के सरकार में आने के पहले हरियाणा में किसानों का शोषण हो रहा था। उन्होंने एक कंपनी का नाम लेते हुए कहा कि उसकी पूंजी 90 लाख रुपये थी और उसने साढ़े सात करोड़ रुपये की जमीन खरीद थी और एक महीने में वह कंपनी 58 करोड़ रुपये की कंपनी बन गयी।
उनकी इस टिप्पणी के दौरान कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश ने टोका-टोकी की।
भाजपा सदस्य ने कहा कि एक समय ग्रामीण क्षेत्रों में खाने बनाने के लिए जलावन एकत्र करना बड़ी समस्या थी और सूखी लकड़िया लाने में तमाम तरह की परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में किसानों को चौपालों में शरण लेनी होती थी कि उनके घर कच्चे होते थे।
उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेन्द्र मोदी सरकार बनने के बाद स्थिति काफी बदली और अब कमजोर लोगों के लिए पक्के घर बना दिए गए हैं और उन घरों में नल से जल भी पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे घरों की छतों पर सोलर पैनल भी लगाए जा रहे हैं।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा की रेखा शर्मा ने कहा कि सरकार ने 2026-27 के बजट में ग्रामीण विकास के लिए 1.94 लाख करोड़ रूपये आवंटित किये हैं जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने एवं समावेशी विकास के प्रति उसकी प्राथमिकता स्पष्ट होती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की मंशा स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाए और आजीविका को सशक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि नीयत स्पष्ट हो तो नीति के अच्छे परिणाम निकलते हैं।
भाजपा के ही अनिल सुखदेवराव बोंडे ने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के प्रति जो बेरुखी का भाव दिखाया उसके कारण लोगों ने उनकी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि उस सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं शिक्षा और रोजगार पर कोई ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद इन मुद्दों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सिंचाई एवं संपर्क पर बहुत ध्यान दिया जिसके परिणाम अब सामने हैं।
भाजपा के मयंक कुमार नायक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भारत को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की रूपरेखा प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में ग्रामीण विकास के क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाया गया है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार की सराहना की।
भाजपा के ही सुभाष बराला ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि विगत में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति काफी खराब थी और कई गांव तो पक्की सड़क से जुड़े भी नहीं थे। इस क्रम में उन्होंने मध्यप्रदेश के राघोगढ़ का जिक्र किया और कहा कि 2003 में एक उपचुनाव में पार्टी का काम करने के लिए वह वहां गए थे लेकिन उस समय वहां सड़क नहीं थी।
बराला ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के विकास पर जोर दिया और उसे मोदी सरकार ने आगे बढ़ाया।
उनकी ही पार्टी की धर्मशीला गुप्ता ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था और मोदी सरकार ने उसे दूर करने का प्रयास किया।
नेकां सदस्य चौधरी मोहम्मद रमजान ने मंत्रालय को अधिक धनराशि आवंटित करने की मांग की। उन्होंने केंद्रशासित क्षेत्र जम्मू कश्मीर को पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों की तर्ज (90 अनुपात 10) पर राशि आवंटित करने की भी मांग की।
भाजपा के अमरपाल मौर्य ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद गांवों के बारे में जो चिंतन किया जाना चाहिए था, वह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस वजह से गांवों से बड़ी संख्या में किसानों और अन्य लोगों का शहरों की पलायन हुआ। उन्होंने कहा कि गांव में जो लोग किसान थे, उन्हें शहरों में मजदूर बना दिया गया।
भाजपा के ही मिथलेश कुमार ने मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत किया।
चर्चा में भाजपा के धनंजय महादिक, सदानंद महालू शेट तानवड़े सहित अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया।
भाषा माधव अविनाश
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