विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा इसलिए लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ संकल्प लाया गया : चिराग
सुरेश
- 10 Mar 2026, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसके पास कोई मुद्दा नहीं बचा है और उसे राष्ट्रहित में लिये जाने वाले फैसलों से परेशानी है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये गए विपक्ष के संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए पासवान ने कहा कि अध्यक्ष कोई व्यक्ति विशेष नहीं होता, बल्कि वह संविधान के आधार पर काम करता है।
उन्होंने विपक्षी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पश्चिम बंगाल में अपमान किया गया।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान ने कहा, ''उन्हें (विपक्ष को) तकलीफ इस बात से है कि देश के सबसे वंचित वर्ग से आने वाली एक महिला सर्वोच्च पद पर आसीन हैं। यही बात उन्हें चुभती है।''
पासवान ने कहा कि विपक्ष के लोगों को दिककत इस बात से है कि उच्च पद पर आसीन व्यक्ति ऐसा निर्णय ले रहा है, जो राष्ट्रहित में है।
उन्होंने कहा, ''विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है इसलिए वे लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ यह संकल्प लेकर आए हैं।''
वहीं, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता ''भारत-विरोधी'' एजेंडा फैलाते हैं और जब भी संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा होती है, तो वह अनुपस्थित रहते हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल को पिछले साल मई में (ऑपरेशन सिंदूर के दौरान) सशस्त्र बलों की सफलता से ज्यादा इस बात की चिंता थी कि पाकिस्तान में कितने विमान गिराए गए।
शिंदे ने कहा, ''(लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता) गौरव गोगोई ने अपने भाषण में कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बोलते समय राहुल गांधी जी को 20 बार टोका गया। मैं उनसे कहना चाहूंगा कि अगर आप देश के खिलाफ बोलेंगे तो हम आपको 200 बार टोकेंगे।''
उन्होंने कहा, ''गोगोई ने प्रधानमंत्री को कमजोर बताया। कोई भी देश कमजोर देश के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं करता। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने हमारे साथ व्यापार समझौता किया है।''
राहुल पर हमला करते हुए शिंदे ने कहा कि विपक्ष के नेता प्रश्नकाल या शून्यकाल के दौरान कभी मुद्दे नहीं उठाते और लोकसभा में अपने कार्यकाल में उन्होंने एक भी गैर-सरकारी विधेयक पेश नहीं किया है।
उन्होंने राहुल पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि कुछ लोग संविधान और संसद जैसी संस्थाओं को बचाने की यहां पैरोकारी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''विपक्ष के युवा साथियों को कहना चाहूंगा कि अपने नेता के प्रति अंधभक्ति को थोड़ा संभालकर रखिये, जो आज भी सदन में उपस्थित नहीं हैं। जो महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान अनुपस्थित रहते हैं।''
शिंदे ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी का हवाला देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने कहा था कि सांसद किसी व्हिप से बंधे हुए नहीं हैं।
शिंदे ने कहा, ''संकल्प पर मतदान के समय विपक्ष के सदस्य अपनी अंतरात्मा से अवश्य पूछें। 'पार्लियामेंट पैरालिसिस' नहीं, 'पार्लियामेंट प्रोग्रेस' चाहिए।''
वहीं, कांग्रेस की एस. ज्योतिमणि ने संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि सत्तापक्ष के लोग राहुल गांधी के सवालों का उत्तर नहीं दे सकते, इसलिए उन्हें बोलने नहीं देते।
उन्होंने कहा, ''हमें चुप कराने के लिए (आठ) विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया गया।''
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को राजनीति से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अध्यक्ष को पद की तटस्थता, और सभी (सदस्यों की) आवाज की रक्षा करनी चाहिए, न कि असहमति की आवाज दबानी चाहिए।''
ज्योतिमणि ने भाजपा के निशिकांत दुबे की टिप्पणियों को लेकर उनपर निशाना साधते हुए कहा, ''हमारे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ निशिकांत दुबे ने आ़पत्तिजनक टिप्पणी की, जबकि सरकार के सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। एप्स्टीन फाइल में नाम आया है।''
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