लोकसभा में सांसद की अभिव्यक्ति की आजादी पर आसन भी रोक नहीं लगा सकता: मनीष तिवारी
हक
- 10 Mar 2026, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को दावा किया कि संविधान के तहत लोकसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को कोई विशेष दर्जा नहीं दिया गया, वहीं सांसदों को विशेष दर्जा प्राप्त है और सदन में किसी भी सदस्य की बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी पर आसन भी रोक नहीं लगा सकता।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा सदन में लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए तिवारी ने यह टिप्पणी की।
विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में बोलने नहीं देने और पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ संकल्प पेश किया है।
तिवारी ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष को कानून में वैधानिक दर्जा दिया गया है और सदन में ऐसी परंपराए देखी गई हैं जब नेता प्रतिपक्ष बैठे-बैठे इशारा भी कर देते थे तो उनका माइक ऑन हो जाता था और आसन से उन्हें बोलने की अनुमति मिल जाती थी, लेकिन राहुल गांधी को बोलने नहीं देना उनकी अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाना है।
उन्होंने कहा, ''संविधान के तहत लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को कोई विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है। वे केवल कार्यवाही के संचालक हैं। बाद में सदन की नियम प्रक्रियाओं में भले ही उनका व्यापक मूल्यांकन किया गया है। उसके विपरीत संविधान के अनुच्छेद 105 में सांसदों को विशेष दर्जा दिया गया है।''
उन्होंने कहा, ''उस विशेष दर्जे में मूलभूत बात है कि इस सदन में किसी भी सदस्य की अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी पर कोई रोक नहीं लगा सकता। आसन भी रोक नहीं लगा सकता। यह संवैधानिक स्थिति है।''
तिवारी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन की बात कही गई है, चुनाव की नहीं। उन्होंने कहा कि यह अलग बात है कि सदन की नियम प्रक्रियाएं बनाई गईं तो इसमें परिवर्तन किया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान में उपाध्यक्ष पद की अनिवार्यता की बात है, लेकिन पिछले सात साल से इस सदन में सरकार की ओर से इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया गया कि सदन का उपाध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया।
उन्होंने कहा, ''संविधान की मर्यादाओं का इस तरह खिलवाड़ होगा तो संवैधानिक प्रणाली पर नकारात्मक असर पड़ेगा।''
तिवारी ने कहा कि बजट सत्र के पहले चरण में जब राष्ट्रपति अभिभाषण से संबंधित धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने एक पत्रिका को उद्धृत किया जो सार्वजनिक उपलब्ध है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने आज तक उस पत्रिका की विषयवस्तु का खंडन नहीं किया है, लेकिन उसे उद्धृत करने पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, ''यह किस तरह का लोकतंत्र है। एक काल्पनिक बात बना ली गई कि कोई पुस्तक छपी नहीं। नेता प्रतिपक्ष किसी पुस्तक का हवाला दे ही नहीं रहे थे, वह एक प्रकाशित आलेख के अंश पढ़कर सुनाना चाह रहे थे। एलओपी को बोलने नहीं देना उनकी अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाना है।''
तिवारी ने कहा कि एलओपी को कानून में वैधानिक दर्जा दिया है और सदन में ऐसी परंपराए देखी गई हैं जब नेता प्रतिपक्ष बैठे-बैठे इशारा भी कर देते थे तो उनका माइक ऑन हो जाता था और आसन से उन्हें बोलने की अनुमति मिल जाती थी।
उन्होंने कहा, ''अब नेता प्रतिपक्ष यदि कोई ऐसी बात कह दें जो सरकार के अनुकूल नहीं हों तो माइक बंद कर दिया जाता है। यह कैसी परंपरा है।''
तिवारी ने यह भी कहा कि कुछ विपक्षी महिला सदस्यों के प्रधानमंत्री की सीट के करीब पहुंचने को सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा बताना पूरी तरह बेतुकी बात है और ''इसके लिए आसन को उन महिला सदस्यों से माफी मांगनी चाहिए।''
उन्होंने 2010 में संसद के शीतकालीन सत्र में '2जी' मुद्दे पर भाजपा नीत तत्कालीन विपक्ष के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा, ''एक बेतुकी सी कैग रिपोर्ट पर भाजपा सांसदों ने पूरा सत्र बेकार कर दिया, जिस रिपोर्ट को बहुमत से खारिज कर दिया गया था। लेकिन एक भी विपक्षी सांसद को निलंबित नहीं किया गया।''
तिवारी ने कहा कि लेकिन दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर केवल सरकार की ओर से बयान मांगा गया था तो ''पूरे विपक्ष को सदन से निलंबित कर दिया गया। ये कैसी लोकतांत्रिक परंपराए हैं।''
उन्होंने कहा, ''यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हम आसन का बहुत सम्मान करते हैं। हम संस्थागत कामकाज में सुधार के लिए इसे लाए हैं जिससे लोकतंत्र के सर्वेच्च मंदिर में सुचारू तरीके से काम किया जा सके।''
भाषा वैभव हक
हक
1003 1928 संसद