पश्चिम बंगाल में कानून का राज नहीं है : नड्डा ने राज्यसभा में कहा
सुभाष
- 10 Mar 2026, 04:10 PM
- Updated: 04:10 PM
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जे पी नड्डा ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून का राज समाप्त हो गया है और राज्य सरकार न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं करती।
उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए नड्डा ने कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर पैदा हुई स्थिति के लिए पश्चिम बंगाल सरकार खुद जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कानून के अनुसार काम कर रही है।
नड्डा तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेन्दु शेखर राय के सवाल का जवाब दे रहे थे। राय ने पूरक प्रश्न में आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर पश्चिम बंगाल में "दबावपूर्ण कदम" उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बंगाल भेजे जाने की भी मांग की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पिछले पांच दिनों से कोलकाता की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन क्यों कर रही हैं।
राय के आरोपों पर नड्डा ने कहा ''उनका (राय का) कहना है कि क्यों एक महिला मुख्यमंत्री को दंडित किया जा रहा है और क्यों इतने कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।''
उन्होंने कहा ''ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल देश का ऐसा राज्य बन गया है जहां नियम-कानून नदारद हैं, कानून का शासन "पूरी तरह खत्म हो गया है।"
उन्होंने कहा कि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक मर्यादाओं का सम्मान नहीं किया जाता और न्यायपालिका को भी धमकाया जाता है।
नड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि हाल में एक महिला मुख्यमंत्री ने देश की महिला राष्ट्रपति का भी अपमान किया है। उन्होंने कहा ''एक महिला मुख्यमंत्री ने भारत के राष्ट्रपति पद का अपमान किया है। उस पद पर एक महिला हैं और वह आदिवासी हैं।''
उन्होंने कहा, ''....कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं, न्यायपालिका का कोई सम्मान नहीं, निर्वाचन आयोग का कोई सम्मान नहीं, और सबको धमका रही हैं...।''
केंद्रीय मंत्री ने कहा ''यह उनकी अपनी हरकत है। और चूंकि भारत सरकार कानून के राज के आधार पर काम करती है, तो यह सब इसी वजह से हो रहा है।''
पूरक प्रश्न पूछते हुए राय ने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की बात करती है, इसलिए उसे यह देखना चाहिए कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री लाखों भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जांच करे कि केवल पश्चिम बंगाल में ही एसआईआर के नाम पर ऐसे कदम क्यों उठाए गए?
राय ने कहा ''केंद्र सरकार को एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर पता लगाना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ और मुख्यमंत्री पिछले पांच दिनों से सड़कों पर क्यों हैं? मेरा सरकार से अनुरोध है कि यह पता लगाया जाए कि एसआईआर के नाम पर अकेले पश्चिम बंगाल में ही ये ज़बरदस्ती के कदम क्यों उठाए गए हैं?''
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में कोलकाता में धरने पर बैठी हैं। 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों में बताया गया कि पिछले वर्ष नवंबर में शुरू हुई इस प्रक्रिया के बाद से राज्य में लगभग 63.66 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 8.3 प्रतिशत है। इससे राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है।
इसके अलावा, लगभग 60.06 लाख मतदाताओं को "विचाराधीन" श्रेणी में रखा गया है, जिनकी पात्रता का कानूनी जांच के बाद फैसला किया जाएगा। इससे आने वाले समय में निर्वाचन क्षेत्रों के समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।
भाषा मनीषा सुभाष
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