लोस अध्यक्ष चुनाव: रणनीति तय करने के लिए आज रात बैठक करेंगे विपक्षी दल
हक हक शफीक
- 25 Jun 2024, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के वास्ते रणनीति तैयार करने के लिए ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों के नेता मंगलवार रात यहां बैठक करेंगे।
कांग्रेस ने कहा कि गेंद अब सरकार के पाले में है कि वह इस मुद्दे पर आम सहमति बनाये क्योंकि परंपरा के मुताबिक उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को मिलना चाहिए।
दूसरी तरफ, तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इस पद के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के कोडिकुनिल सुरेश को उम्मीदवार बनाने पर उनकी पार्टी से सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सुरेश को समर्थन देने को लेकर पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी निर्णय लेंगी।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘‘किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया। कोई बातचीत नहीं हुई, दुर्भाग्य से यह एकतरफा फैसला है।’’
सूत्रों ने कहा कि टीएमसी ने लोकसभा अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए सुरेश के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और हो सकता है कि वह आज रात विपक्ष की बैठक में शामिल न हो।
‘इंडिया’ गठबंधन के शीर्ष नेता अपनी रणनीति तैयार करने के लिए रात आठ बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बैठक करेंगे।
अध्यक्ष पद के लिए चुनाव बुधवार सुबह होगा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष का प्रस्ताव था कि सरकार पिछली परंपराओं के मुताबिक उसे उपाध्यक्ष का पद दे और बदले में वह बिरला की उम्मीदवारी को समर्थन देगी।
सरकार का कहना है कि बिरला की उम्मीदवारी का समर्थन सशर्त नहीं हो सकता क्योंकि अध्यक्ष सभी दलों का होता है और उनके नाम पर सर्वसम्मति होनी चाहिए।
रमेश ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र इस भरोसे पर चलता है कि सत्तारूढ़ दल क्या कहता है, और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह जो करता है उसमें कितना विश्वास झलकता है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को 17वीं लोकसभा (2019-2024) बिना उपाध्यक्ष के चलाने को मिली। ऐसा होना अभूतपूर्व था। 16वीं लोकसभा (2014-2019) में उन्होंने यह पद अपने एक गुप्त सहयोगी को दे दिया था।’’
रमेश का कहना है कि मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी और पीवी नरसिम्हा राव के शासनकाल के दौरान लोकसभा का उपाध्यक्ष एक विपक्षी सांसद हुआ करते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘इंडिया जनबंधन का प्रस्ताव बहुत ही सीधा और सरल था। यह लोकसभा अध्यक्ष के लिए भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करेगा लेकिन उपाध्यक्ष ‘इंडिया जनबंधन’ का होना चाहिए। संसदीय परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह पूरी तरह से वैध प्रस्ताव था। इसके जवाब में सत्तारूढ़ दल ने कहा कि अभी हमें अध्यक्ष के लिए समर्थन दीजिए और हम बाद में उपाध्यक्ष पर चर्चा करेंगे।’’
रमेश ने कहा, ‘‘यह ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ प्रधानमंत्री के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए अस्वीकार्य था। तथास्तु!’’
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि गेंद अभी भी सरकार के पाले में है जो विपक्ष को उपाध्यक्ष का पद दे सकती है।
हुड्डा ने कहा कि अगर सरकार उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को देने का फैसला करती है तो विपक्ष अभी भी बिरला के पक्ष में चुनाव से पीछे हट सकता है।
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