बारामूला: इंजीनियर रशीद के दोनों बेटों ने ‘सच्चाई, न्याय’ के लिए अपना पहला वोट डाला
खारी माधव
- 20 May 2024, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
लंगेट (जम्मू-कश्मीर), 20 मई (भाषा) बारामूला लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार इंजीनियर रशीद के दोनों बेटों ने सोमवार को इस उम्मीद के साथ अपना पहला वोट डाला कि उनके पिता जीत हासिल करेंगे और जेल से बाहर आएंगे।
रशीद आतंक के वित्तपोषण मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, ऐसे में उनके दोनों बेटों ने पिता के चुनाव अभियान का संचालन किया।
आवामी इत्तेहाद पार्टी के प्रमुख एवं दो बार विधायक रह चुके अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद बारामूला से से चुनाव लड़ रहे 22 उम्मीदवारों में से एक हैं। इस सीट पर सोमवार को मतदान जारी है।
रशीद के अलावा, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य मीर फैयाज भी इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
रशीद को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2019 में आंतक के वित्तपोषण से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था। रशीद मुख्यधारा के पहले नेता हैं जिन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया।
इस पूरे चुनाव के दौरान रशीद के बेटे अबरार रशीद और असरार ने पिता के लिए चुनाव अभियान का नेतृत्व किया। दोनों ने भरोसा जताया कि रैलियों में जुटी भारी भीड़ वोट में बदलेगी जिससे उनके पिता को रिहाई मिल जाएगी।
अबरार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि जिन लोगों ने पिछले 10-12 दिनों में इतना उत्साह और दृढ़ संकल्प दिखाया है वे बाहर निकलेंगे और अपना वोट डालेंगे। मैंने पहली बार अपना वोट डाला और मेरा पहला वोट मेरे पिता के लिए था।’’
उन्होंने भरोसा जताया कि ऐसे कई लोग होंगे जो पहली बार वोट डालेंगे और वे उनके पिता को वोट देंगे।
अबरार ने कहा, ‘‘मेरे पिता पांच साल से जेल में हैं। उनकी गिरफ्तारी से चुनाव प्रचार मुश्किल रहा। शुरुआती दिनों में मुझे लगा कि मैं अकेला हूं लेकिन लोग बिना किसी लोभ के मेरे साथ जुड़ते गये और मेरे अंदर आत्मविश्वास आया कि न केवल उत्तरी कश्मीर बल्कि पूरा कश्मीर मेरे साथ खड़ा है।’’
रशीद ने 2008 और 2014 में लंगेट विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी और वर्ष 2019 में उन्होंने संसदीय चुनाव लड़ा लेकिन असफल रहे। यूं तो वह आवामी इत्तेहाद पार्टी का नेतृत्व करते हैं, लेकिन वह यह चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे हैं।
अबरार ने कहा कि वह ये देखकर खुश हैं कि पूरा कश्मीर ‘‘उनके साथ खड़ा’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बेहद खुशी है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और मेरे साथ आए और न्याय तथा सच्चाई का समर्थन किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपना संदेश देने का प्रयास किया और मुझे विश्वास है कि लोग अपने दिल की आवाज सुनेंगे और अत्याचारी तथा उत्पीड़ित के बीच अंतर को समझेंगे। इंशाल्लाह (ईश्वर की इच्छा) वे सच्चाई और न्याय का समर्थन करेंगे।’’
अबरार ने कहा कि उनके पिता हमेशा लोगों की बात सुनते थे और विधानसभा के भीतर तथा बाहर उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाते थे।
भाषा खारी