साइबर अपराध से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई जरूरी: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
खारी
- 20 Feb 2026, 11:38 PM
- Updated: 11:38 PM
जयपुर, 20 फरवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई का शुक्रवार को आह्वान किया जिसे उन्होंने व्यापक समस्या बताते हुए कहा कि इससे भारी वित्तीय नुकसान होता है और संस्थाओं पर भरोसा कमजोर पड़ता है।
वह शुक्रवार रात यहां राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'साइबर सुरक्षा- जागरुकता, संरक्षण एवं न्याय तक समावेशी पहुंच' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रधान न्यायाधीश ने अपने संबोधन में इस समस्या से निपटने के लिए न्यायपालिका के प्रयासों के बारे में बात की। उन्होंने यह भी कहा कि "डिजिटल अरेस्ट" ठगी से जुड़े मामलों में उन्होंने खुद भी दखल दिया है।
उन्होंने कहा, "न्याय की चर्चा के केंद्र में साइबर सुरक्षा है।"
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "डिजिटल दौर में नुकसान बहुत तेजी से फैल सकता है, इसलिए मामूली सी सावधानी ही सुरक्षा बन जाती है। असल में साइबर सुरक्षा पुराने ज्ञान का नया रूप है-बोलने से पहले सोचो और कुछ करने से पहले समझो।"
उन्होंने सलाह दी कि हमेशा जागरूक होकर काम करें, सावधानी से अपनी सुरक्षा करें और यह कभी न मानें कि जो जाना-पहचाना है वह जरूर सुरक्षित ही होगा।
उन्होंने कहा कि देशभर में 66 लाख से अधिक साइबर ठगी की शिकायतें लंबित हैं, जिससे साफ है कि यह बहुत बड़ी और व्यापक स्तर पर फैल चुकी समस्या है और दुनियाभर में इस पर ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हर दूसरे दिन उन्हें पता चलता है कि उनके नाम से एक नयी वेबसाइट बनाई गई है और उससे संदेश भेजे जा रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "एक दिन मेरी बहन और बेटी को भी मेरे नाम से बनी साइट से संदेश मिला। बाद में पता चला कि ये सभी साइट नाइजीरिया से बनाई जा रही हैं। यही इस समस्या की जटिलता है।"
'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़ी ठगी के मामलों पर उन्होंने कहा कि उन्होंने एक बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर खुद संज्ञान लिया था, जिन्होंने साइबर ठगी में अपनी जिंदगी भर की बचत खो दी थी।
उन्होंने कहा, "इस खतरे को देश से खत्म करने में न्यायपालिका जो भी कर सकती है, हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।"
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि साइबर अपराध न्याय मिलने के रास्ते में बड़ी बाधा बन जाता है और इससे लोगों की गरिमा, रोजगार और सुविधाओं पर असर पड़ता है।
उन्होंने कहा, "जब कोई आम आदमी ठगी में अपनी पूरी बचत गंवा बैठता है, तो नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं होता, बल्कि भावनात्मक, सामाजिक और संस्थागत भी होता है। जब कोई 'डीपफेक' वीडियो किसी की छवि खराब कर देता है, तो नुकसान सिर्फ ऑनलाइन नहीं रहता, बल्कि उसकी इज्जत और रोजगार पर भी असर पड़ता है।"
'डीपफेक' एक ऐसी तकनीक है जिसमें कृत्रिम मेधा की मदद से किसी व्यक्ति का नकली वीडियो, ऑडियो या तस्वीर बनाई जाती है, जो देखने-सुनने में बिल्कुल असली जैसी लगती है।
सीजेआई ने डिजिटल क्रांति के फायदों को माना, लेकिन उसके गलत इस्तेमाल के खतरों को लेकर आगाह भी किया।
उन्होंने कहा कि सरकारें डिजिटल तरीकों से लोगों को सुविधाएं दे रही हैं और लोग उनका इस्तेमाल भी कर रहे हैं, लेकिन चिंता सिर्फ इतनी है कि जब तकनीक बेकाबू हो जाए तो उसे नियंत्रित किया जा सके।
उन्होंने कहा, ''साइबर सुरक्षा सिर्फ बैंक खाते बचाने की बात नहीं है, बल्कि संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखने की बात है। भरोसा न हो तो सबसे अच्छी न्याय व्यवस्था भी कमजोर पड़ जाती है।''
एआई पर उन्होंने कहा कि वह न्याय प्रणाली में इसके इस्तेमाल का समर्थन करते हैं, लेकिन उतना ही जितना इससे मामलों का जल्दी और कम खर्च में निपटारा हो सके, और यह हमेशा इंसान-केंद्रित रहे।
उन्होंने कहा, "एआई अमूलचूल बदलाव लाने वाली तकनीक बन सकती है...… नैतिक नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है, कानून-नियम लचीले होने चाहिए और संस्थाओं को सतर्क रहना चाहिए। तकनीक को न्याय में मदद करनी चाहिए, लेकिन न्याय की जगह नहीं लेनी चाहिए।"
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साइबर अपराध को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक दोधारी तलवार की तरह है- फायदे देती है लेकिन सतर्क रहने की भी जरूरत है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' के दृष्टिकोण का उदाहरण देते हुए कहा कि जो कभी सपना था, अब वह हकीकत बन चुका है।
उन्होंने कहा, "यहां तक कि सब्जी बेचने वाला भी अपने खाते में डिजिटल तरीके से भुगतान पा रहा है। गांवों में किसान डिजिटल तरीकों से फसल बीमा का लाभ उठा रहे हैं।"
तीन दिवसीय सम्मेलन राजस्थान राज्य विधि सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार हमेशा अदालतों के ढांचे को बेहतर बनाने में सबसे आगे रही है।
राजस्थान राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र भाटी ने अदालतों को बार-बार मिल रही बम की धमकियों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय को कई बार धमकियां मिली हैं।
उन्होंने कहा, "सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हमें भवन खाली करना पड़ता है, जिसे किसी भी हाल में तोड़ा नहीं जा सकता।"
उन्होंने कहा कि ये ईमेल नकली सर्वर से आ रही हैं और अपराधियों को पकड़ना बहुत मुश्किल है।
भाषा पृथ्वी खारी
खारी
2002 2338 जयपुर