लोकसभा चुनाव: लद्दाख में छठी अनुसूची, रोजगार प्रमुख मुद्दे
प्रशांत सुरेश
- 18 May 2024, 06:19 PM
- Updated: 06:19 PM
(अंजलि ओझा)
लेह/करगिल, 18 मई (भाषा) संविधान के अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार अपना सांसद चुनने के लिए मतदान करने जा रहे लद्दाख के लोगों के लिए छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपाय, राज्य का दर्जा और रोजगार प्रमुख मुद्दे हैं।
दो दूरस्थ जिलों में समाहित यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र इलाके के हिसाब से देश में सबसे बड़ा है।
लगभग 59,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ लद्दाख दिल्ली के आकार से लगभग 40 गुना बड़ा है। लद्दाख में लेह और करगिल के दो जिले भौगोलिक और धार्मिक आधार पर विभाजित हैं। बौद्ध बहुल लेह और शिया मुस्लिम बहुल करगिल चार मांगों को लेकर एकमत हैं- संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, राज्य का दर्जा, स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में आरक्षण और एक अलग लोक सेवा आयोग तथा क्षेत्र के लिए दो लोकसभा सीट।
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा साझा करने वाले लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।
लेह ने जहां शुरू में इस कदम का स्वागत किया, वहीं करगिल में लोग विभाजन से नाखुश थे। हालांकि, जल्द ही भूमि और नौकरियों के लिए सुरक्षा उपायों पर चिंताएं हावी हो गईं और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
लेह के एक छात्र नेता पद्म स्टैनजिन ने कहा कि रोजगार एक बड़ी चिंता है, क्योंकि 2019 के बाद से राजपत्रित पद पर एक भी भर्ती नहीं हुई है।
इसी तरह की चिंता लेह की एक युवती नॉर्डन ने भी उठाई, जिन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छठी अनुसूची सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि लोगों की मांग है।
उन्होंने कहा, “यहां की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी है। नौकरियां एक बड़ी चिंता है, क्योंकि लद्दाख में बेरोजगारी की दर देश में सबसे ज्यादा है।”
नॉर्डन ने कहा, “जो भी पार्टी हमारी मांगों को पूरा करने का वादा करेगी, उसे हमारा समर्थन मिलेगा।”
लद्दाख में दो मुख्य राजनीतिक दल हैं भाजपा और कांग्रेस।
भारतीय जनता पार्टी ने लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के अध्यक्ष ताशी ग्यालसन को चुनाव में उतारा है। कांग्रेस ने परिषद में विपक्ष के नेता, सेरिंग नामग्याल को अपने उम्मीदवार के रूप में चुना है। तीसरे उम्मीदवार करगिल से मोहम्मद हनीफा जान हैं, जिन्हें हाजी हनीफा के नाम से जाना जाता है। वह नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों का वादा किया है, जबकि हनीफा ने सभी चार मांगों का उल्लेख किया है। भाजपा का घोषणापत्र छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे पर चुप है, लेकिन ग्यालसन और पार्टी के अन्य नेताओं ने अपने अभियान के दौरान स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया है कि बातचीत जारी रहेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छठी अनुसूची पर अपना वादा पूरा नहीं करने के लिए भाजपा के खिलाफ गुस्सा है, जिसका वादा 2019 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ 2020 में लेह पहाड़ी परिषद चुनावों के दौरान किया गया था।
स्टैनजिन ने कहा, “हमें सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। इसीलिए हम छठी अनुसूची की मांग कर रहे हैं, ताकि हमारे हितों की रक्षा हो सके। इसके लिए तीन मार्च को रैली निकाली गई और फिर छह मार्च से सोनम वांगचुक अनशन पर बैठ गए।”
वांगचुक का अनशन 66 दिन चला और चुनाव से पहले उसे स्थगित किया गया।
भारत के सबसे सुदूरवर्ती गांवों में से एक तुरतुक के मेहदी शाह कहते हैं कि सांस्कृतिक पहचान खोने के साथ-साथ पर्यावरण को नुकसान होने का भी डर है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि छठी अनुसूची चुनाव में हमारी मुख्य मांग है।
यहां से 200 किलोमीटर से अधिक दूर करगिल में भी लोग इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हैं। यद्यपि उनका कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा लेह की मांग थी, चार सूत्री मांग अब प्रमुख मुद्दा है।
हाजी मोहम्मद कासिम का कहना है कि धारा 370 उनके लिए कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन वह चाहते हैं कि इस बार करगिल से कोई उनका प्रतिनिधित्व करे।
उन्होंने कहा, “धारा 370 कोई मुद्दा नहीं है। इस बार लोग चाहते हैं कि करगिल से कोई व्यक्ति निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करे। अगर कांग्रेस यहां से किसी को मैदान में उतारती तो हम उसका समर्थन करते। अब, हमारे पास एक स्वतंत्र उम्मीदवार है और हम उसका समर्थन करने के लिए एकजुट हैं।”
फैयाज होजाजी ने कहा कि छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे के साथ-साथ रोजगार एवं शिक्षा के अवसर मुख्य चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकांश प्रशासनिक विभाग और अधिकारी लेह में तैनात हैं, इसलिए यह स्थानीय लोगों के लिए एक समस्या है। करगिल से लेह तक की यात्रा में पांच घंटे से अधिक समय लगता है और स्थानीय लोगों को निजी परिवहन या टैक्सियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्थानीय पत्रकार मोहम्मद इशाक ने कहा कि जहां भाजपा सत्ता-विरोधी लहर का सामना कर रही है, वहीं अन्य पार्टियां इस तथ्य पर भरोसा कर रही हैं कि वे स्थानीय लोगों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं।
लद्दाख में लगभग 1.84 लाख मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 96,000 करगिल जिले में और 88,000 से अधिक लेह जिले में हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में 20 मई को मतदान होना है।
भाषा प्रशांत