कान फिल्म महोत्सव में दिखाई गई श्याम बेनेगल की फिल्म 'मंथन'
शुभम सुरेश
- 18 May 2024, 03:45 PM
- Updated: 03:45 PM
कान, 18 मई (भाषा) फ्रांस में चल रहे 77वें कान फिल्म महोत्सव में नये भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सुर्खियों में रहा। गुजरात के एक गांव में भारत की पहली डेरी सहकारी संस्था के निर्माण से जुड़ी श्याम बेनेगल की 1976 की फिल्म "मंथन" का 4के वीडियो रेज्योलूशन संस्करण सैले बुनुएल में प्रदर्शित किया गया।
फिल्म के कलाकारों में शामिल नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म के प्रदर्शन से पहले अपने विचार प्रकट किये। दिग्गज अभिनेता ने कहा, ‘‘सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, ‘मंथन’ का यह शो डॉ. वर्गीज कुरियन को समर्पित है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह स्मिता पाटिल, गिरीश कर्नाड, अमरीश पुरी और संगीतकार वनराज भाटिया को याद करने का भी अवसर है।’’
शाह ने कहा, ‘‘बड़े पर्दे पर बतौर अभिनेता यह मेरी दूसरी फिल्म थी। मैं इस बात को लेकर बेहद घबराया हुआ था कि यह बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करेगी। किसी ने भी इस फिल्म को लेकर कोई उम्मीद नहीं जताई थी, लेकिन यह एक हिट फिल्म साबित हुई, जिसने हम सभी के लिए काम के और अधिक अवसर पैदा किये।"
अभिनेता ने कहा कि ऐसे समय में जब हिंदी फिल्म निर्माता केवल दर्शकों की पसंद से फिल्में बनाते थे, लेकिन श्याम बेनेगल ने "समय की सच्चाई के बारे में बोलने के तरीके खोजे"।
फिल्म "मंथन" का निर्माण दुग्ध उत्पादक पांच लाख किसानों से 2-2 रुपये की सहयोग राशि से किया गया था। यह बेनेगल की पहली दो फिल्मों, "अंकुर" (1974) और "निशांत" (1976) के बाद बनाई गयी थी।
कान फिल्म महोत्सव में निर्देशक श्याम बेनेगल की फिल्म "मंथन" दिखाई गई, जो लोगों के दिलों पर फिर से छाप छोड़ने में सफल रही।
मंथन फिल्म 48 साल पहले बनाई गई थी और इसके निर्माण में गुजरात के पांच लाख किसानों ने धन दिया था।
वर्ष 1976 में बनी यह फिल्म डॉ. वर्गीज कुरियन के दुग्ध सहकारी आंदोलन से प्रेरित है, जिसे शुक्रवार को ‘कान क्लासिक्स’ वर्ग के तहत प्रदर्शित किया गया।
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी पत्नी रत्ना पाठक शाह, दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक बब्बर, डॉ. कुरियन की बेटी निर्मला कुरियन और अमूल के प्रबंध निदेशक (एमडी) जयेन मेहता के साथ कान में रेड कार्पेट पर नजर आए।
अमूल के आधिकरिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा गया, "मंथन टीम के नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, प्रतीक बब्बर, निर्मला कुरियन, फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (एफएचएफ) की आधिकारिक टीम और अमूल के एमडी जयेन मेहता कान फिल्म महोत्सव में 36 लाख किसान उत्पादकों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।"
स्मिता पाटिल-अभिनीत यह फिल्म वर्गीज कुरियन के दुग्ध सहकारी आंदोलन से प्रेरित थी। वर्गीज ने भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में से एक में बदलने के लिए 'ऑपरेशन फ्लड' का नेतृत्व किया। उन्हें अमूल को अरबों डॉलर का ब्रांड बनाने का श्रेय दिया जाता है।
फिल्म ने 1977 में दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते।
स्वास्थ्य कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए बेनेगल ने उन पलों को याद किया कि कैसे गुजरात के किसानों ने सिनेमाघरों में सामूहिक रूप से फिल्म देखकर इसे हिट बनाया था।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फिल्म बनाने में मदद की थी उन्होंने इसे सफल बनाने में भी मदद की। गुजरात के सौराष्ट्र में रिलीज हुई फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया।
फिल्म निर्माता (89) ने इस सप्ताह की शुरुआत में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, "वे (किसान) चाहते थे कि हर कोई इसे देखे, क्योंकि उनका मानना था कि यह उनकी फिल्म है। वे सभी बैलगाड़ी पर सवार होकर फिल्म देखने आए, भले ही वे अहमदाबाद, वड़ोदरा या गुजरात के अन्य स्थानों से क्यों न हों। हमने किसी भी तरह का प्रचार नहीं किया। फिल्म ने खुद ही ऊंचाइयों को छुआ।''
भाषा
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