संप्रग शासन में व्यापार वार्ता की प्रधानमंत्री की ओर से की गई आलोचना 'अनुचित और गलत' : कांग्रेस
प्रशांत
- 15 Feb 2026, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुई व्यापार वार्ताओं की आलोचना पर पलटवार करते हुए रविवार को कहा कि उनके आरोप 'गलत' हैं क्योंकि भारत ने संप्रग शासनकाल के दौरान एक ''आत्मविश्वासी राष्ट्र'' के रूप में कई महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों पर बातचीत की और हस्ताक्षर किए।
पूर्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग्र) शासन के दौरान ''खराब आर्थिक प्रबंधन'' और कमजोर वार्ताओं के बारे में प्रधानमंत्री मोदी का आरोप ''अनुचित और गलत'' है।
शर्मा ने एक बयान में कहा, ''यह स्पष्ट करना अहम है कि क्या सच है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संपग्र सरकार के दौरान, भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की औसत वार्षिक वृद्धि दर आठ प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई।''
उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2008 के वित्तीय संकट के बाद वैश्विक मंदी का सामना किया और तेजी से उबरी।
शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ''संकट से निपटने के लिए विश्व के नेताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दूरदर्शिता का सहारा लिया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के कार्यकाल में भारत की जीडीपी लगभग तीन गुना बढ़कर 2000 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई। व्यापारिक निर्यात बढ़कर 320 अरब डॉलर हो गया और मई 2014 में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 रुपये था, जबकि 2026 में यह 91 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया है।''
संप्रग सरकार में वाणिज्य मंत्री रहे शर्मा ने कहा कि भारत ने एक ''आत्मविश्वासी और संप्रभु राष्ट्र'' के रूप में आसियान, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और मलेशिया के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत की और हस्ताक्षर किए हैं।
शर्मा ने भारत द्वारा यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता 'झुकना' है और अपारदर्शिता से घिरा हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में पारदर्शिता और पारस्परिकता का अभाव है, जिससे कृषि, कपास और वस्त्र जैसे कई संवेदनशील क्षेत्र असुरक्षित हो गए हैं।
शर्मा ने कहा, ''रूस से भारत की तेल खरीद के भविष्य पर अमेरिका के बयान को देखते हुए भारत की संप्रभुता और साझेदार देशों के साथ व्यापार करने की स्वतंत्रता से समझौता किया गया है।'' उन्होंने मांग की कि सरकार को अमेरिकी समझौते का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने संप्रग सरकार के दौरान हुई व्यापार वार्ताओं की तीखी आलोचना करते हुए रविवार को कहा कि इसके ''आर्थिक कुप्रबंधन'' के कारण भारत भरोसे की स्थिति से बातचीत करने में असमर्थ रहा और कभी किसी भी वार्ता को निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा सका।
'पीटीआई-भाषा' के साथ विशेष साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत
1502 2224 दिल्ली