वृहद आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतकों से तय होगी स्थानीय शेयर बाजार की दिशा
अजय
- 15 Feb 2026, 03:38 PM
- Updated: 03:38 PM
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) स्थानीय शेयर बाजारों की दिशा अगले सप्ताह वृहद आर्थिक आंकड़ों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों तथा एआई से जुड़े बदलावों को लेकर पैदा हुई चिंता से जुड़े घटनाक्रमों से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। हालांकि, शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सावधानी बरत सकते हैं।
विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियां और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ''निकट भविष्य में शुल्क से जुड़ी चिंताएं कम होने और घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के मिले-जुले तिमाही नतीजों का सीजन समाप्त होने के करीब होने के बीच बाजार मुख्य रूप से वैश्विक संकेतकों पर निर्भर करेगा। इसमें अमेरिका के श्रमबल के आंकड़े और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर उम्मीदें शामिल हैं।''
नायर ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और धातु क्षेत्र को लगातार संरचनात्मक और बाहरी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बाजार के खिलाड़ी बैंकिंग, वाहन और कुछ खास उपभोक्ता खपत आधारित क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, नायर ने कहा कि जब तक साफ वृहद आर्थिक और नीतिगत संकेतक नहीं मिलते हैं, प्रमुख सूचकांक एक सीमित दायरे में रहेंगे।
पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 953.64 अंक या 1.14 प्रतिशत नीचे आया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 222.6 अंक या 0.86 प्रतिशत के नुकसान में रहा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ''बाजार की निगाह थोक मुद्रास्फीति और व्यापार संतुलन के आंकड़ों पर रहेगी। प्रमुख आंकड़े मसलन एचएसबीसी विनिर्माण और सेवा पीएमआई, बैंक कर्ज की वृद्धि और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहेंगे।''
उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह शेयर बाजार में काफी हद तक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और विदेशी निवेशकों के ताजा प्रवाह से जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ।
नायर ने कहा, "वैश्विक संकेतों और रुपये की मजबूती से बाजार को गति मिली। हालांकि, तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों के कारण मुनाफावसूली भी देखने को मिली। साथ ही एआई से जुड़े बदलावों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण वैश्विक बाजार में बिकवाली हुई, जिससे आईटी शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली।"
शुक्रवार को रुपया एक सीमित दायरे में मजबूत हुआ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे टूटकर 90.66 पर बंद हुआ।
भू-राजनीतिक तनाव से भी बाजार की धारणा प्रभावित हुई। अमेरिका के रोजगार के आंकड़ों से भविष्य में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं।
विश्लेषकों ने कहा कि जब तक कि स्पष्ट वृहद आर्थिक और नीतिगत संकेत नहीं मिलते हैं तब तक प्रमुख सूचकांकों के सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है।
भाषा अजय अजय योगेश
अजय
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