राष्ट्रगान से पहले 'वंदे मातरम्' गाने के केंद्र के निर्देश पर बंगाल में सियासी घमासान शुरू
नरेश
- 12 Feb 2026, 08:21 PM
- Updated: 08:21 PM
कोलकाता, 12 फरवरी (भाषा) आधिकारिक समारोह में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सभी छह छंद को राष्ट्रगान जन गण मन से पहले गाए जाने के केंद्र के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तीखी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस आदेश को रवींद्रनाथ टैगोर को "कमतर दिखाने" और चुनावी लाभ के लिए प्रतीकवाद बढ़ाने का प्रयास बताया, वहीं कांग्रेस ने इसे "विभाजनकारी हथकंडा" करार दिया।
भाजपा का कहना है कि यह केवल ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के गीत को पूरा सम्मान वापस दिलाने का प्रयास है।
यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ। बुधवार को अधिसूचित आदेश में गृह मंत्रालय ने कहा कि जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान साथ-साथ गाए जाएं, तो वंदे मातरम् को जन गण मन से पहले गाना अनिवार्य है।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि पार्टी को बंकिमचंद्र के योगदान को उजागर करने में "कोई आपत्ति नहीं" है, लेकिन आरोप लगाया कि यह कदम टैगोर को "कमतर" दिखाने का प्रयास है।
बसु ने कहा, ''इस बात पर जोर देकर कि वंदे मातरम् को जन गण मन से पहले गाया जाना चाहिए, वे एक श्रेणी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में रवींद्रनाथ का अपमान किया गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि "कुछ सांप्रदायिक ताकतें" ऐतिहासिक रूप से टैगोर के समावेशी और धर्मनिरपेक्ष विश्वदृष्टिकोण से असहज हैं।
राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए याद दिलाया कि उन्होंने एक बार संसद में बंकिमचंद्र को "बंकिम-दा" कहा था। उन्होंने कहा, "क्या यह उस घाव पर मरहम लगाने का प्रयास है?"
बसु ने आदेश के समय को आगामी विधानसभा चुनावों से भी जोड़ा और दावा किया कि "ममता बनर्जी के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद" निर्देश को भुला दिया जाएगा।
कांग्रेस ने भी इस आरोप को दोहराया और कहा कि इस कदम का उद्देश्य चुनाव से पहले "राजनीतिक लाभ हासिल करना" है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने इसे "विभाजन की रणनीति" करार दिया।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आलोचना को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर "सांप्रदायिक तुष्टीकरण" के दबाव में वंदे मातरम् को ऐतिहासिक रूप से छोटा किए जाने का आरोप लगाया।
भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख सुसंगत है और चुनाव से प्रेरित नहीं है।
उन्होंने टैगोर को कमतर आंकने के आरोपों को "बचकाना" बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ''भाजपा के हर सम्मेलन में पूरा वंदे मातरम् गाया जाता है। यह कोई नयी बात नहीं है। गीत की रचना का 150वां वर्ष एक मील का पत्थर है। प्रयास इसे इसकी पूर्ण गरिमा में बहाल करने का है।"
भाषा आशीष नरेश
नरेश
1202 2021 कोलकाता