राज्यसभा : कांग्रेस सदस्य ने सरकार पर लगाया किसान विरोधी होने का आरोप
अविनाश
- 11 Feb 2026, 02:53 PM
- Updated: 02:53 PM
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस के अशोक सिंह ने केंद्र सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सोयाबीन के उत्पादन के लिए विख्यात मध्यप्रदेश में ग्वालियर, चंबल, मालवा के किसान अपनी लागत नहीं निकाल पा रहे हैं, वहीं सरकार समझौते के तहत अमेरिका से सोयाबीन तेल और अनाज के आयात के लिए दरवाजे खोल रही है।
सिंह ने इसे सोयाबीन किसानों के लिए दोहरी मार बताते हुए शून्यकाल के दौरान कहा कि सोयाबीन किसानों ने अपने पसीने से मध्यप्रदेश को संपन्न बनाया लेकिन आज यह 'पीला सोना' ही उनके लिए मुश्किल बन गया है।
उन्होंने कहा कि एक ओर ग्वालियर, चंबल, मालवा के किसान सोयाबीन उपज की लागत नहीं निकाल पा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार नए समझौते के तहत अमेरिका से सोयाबीन तेल और अनाज के आयात के लिए दरवाजे खोल रही है।
सिंह ने कहा कि सरकार ने 2025-26 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5300 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था लेकिन हकीकत यह है कि इंदौर, देवास, श्योहर के किसान 3000 रुपये प्रति क्विंटल पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हैं। ''लागत दोगुनी हो गई लेकिन उन्हें इसका 60 फीसदी भी नहीं मिल पा रहा है।''
उन्होंने कहा ''आज मध्यप्रदेश का किसान दोहरी मार का सामना कर रहा है। एक तरफ उपज का उत्पादन घट रहा है वहीं दूसरी ओर उसकी उपज की लागत नहीं निकल पा रही है। और उस पर सरकार ने सस्ते सोयाबीन के आयात की राह खोल दी। अमेरिकी सोयाबीन की कीमत 35000 रुपये प्रति टन है और हमारे किसान को कम से कम 55000 रुपये प्रति टन मिलना चाहिए।''
सिंह ने कहा कि यह समझौता किसानों के साथ बड़ा धोखा है। ''अमेरिका से सस्ता सोयाबीन तेल और अनाज भारत के बाजारों में आया तो मध्यप्रदेश के 150 से अधिक प्रसंस्करण केंद्र बंद हो जाएंगे, लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाएगी और अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। राज्य में करीब 600 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।''
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ आत्मनिर्भरता का नारा दे रही है और दूसरी ओर किसानों की जान जा रही है।
कांग्रेस की ही जेबी माथेर हीशम ने छात्र-छात्राओं की आत्महत्या के बढ़ते मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये छात्र-छात्रा अपना करियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और कठोर प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं। ''लेकिन मुश्किल यह होती है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर किसी को सफलता नहीं मिल पाती।''
हीशम ने कहा कि आज लगभग हर युवा मोबाइल फोन का उपयोग करता है और सोशल मीडिया कहीं न कहीं उसे प्रभावित करता है। उन्होंने कहा ''सोशल मीडिया का प्रभाव कई बार असफलता पर इस कदर हावी हो जाता है कि छात्र आत्महत्या की राह चुन लेते हैं।''
उन्होंने सरकार से कोई ऐसी नीति बनाने की मांग की जो छात्रों के लिए उपयोगी हो और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने से रोकने में मददगार हो।
शून्यकाल में ही भारतीय जनता पार्टी के मयंक कुमार नायक ने गुजरात के गांधी नगर से वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने की मांग की।
द्रमुक के आर गिरिराजन ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने नौकरी देने का वादा किया था वह अब तक पूरा नहीं हुआ, इसके विपरीत बेरोजगारों की तादाद बढ़ती गई।
भाषा
मनीषा अविनाश
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