विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर विचार के लिए संसद में संयुक्त समिति गठित
माधव
- 11 Feb 2026, 01:32 PM
- Updated: 01:32 PM
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक बनाने का प्रस्ताव करने वाले 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' (वीबीएसए) पर गौर करने के लिए संसद में 31 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व बीजेपी सांसद डी. पुरंदेश्वरी करेंगी।
लोकसभा सचिवालय द्वारा मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस समिति में दोनों सदनों के सदस्य शामिल हैं और यह प्रस्तावित कानून के प्रावधानों की समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
संसद में वीबीएसए विधेयक को शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किया गया था। यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा नियामक ढांचे में व्यापक बदलाव करने का उद्देश्य रखता है। प्रस्तावित कानून का लक्ष्य विभिन्न मौजूदा नियामकों को एक ही व्यापक संस्था से बदलना और मान्यता, वित्त पोषण और मानक निर्धारण की जिम्मेदारियों को अलग करना है।
समिति में राज्यसभा से भाजपा के सुरेंद्र सिंह नगर, सुधांशु त्रिवेदी और मीना कुमारी जैन, बीजू जनता दल के प्रदीप कुमार वर्मा और सस्मित पात्रा, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम. थंबिदुरै, जनता दल (यूनाइटेड) के संजय कुमार झा तथा समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव को लिया गया है।
समिति में लोकसभा से लिए गए सदस्यों में भाजपा की डी पुरंदेश्वरी, भृतहरि माहताब, संबित पात्रा, तेजस्वी सूर्या, अनुराग सिंह ठाकुर, बांसुरी स्वराज, विवेक ठाकुर, हेमांग जोशी और बृजमोहन अग्रवाल, कांग्रेस की वर्षा एकनाथ गायकवाड़, अंगोमचा बिमोल अकोइजाम, वंसी कृष्ण गड्डम, आईयूएमएल ई. टी. मोहम्मद बशीर, समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, द्रमुक के टी. आर. बालू, तेलुगु देसम पार्टी के श्रीभरत माथुकुमिली और जनता दल (यूनाइटेड) के आलोक कुमार सुमन शामल हैं।
सरकार ने लोकसभा में कहा था कि विपक्षी दलों द्वारा संघवाद, संस्थागत स्वायत्तता और शक्तियों के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंता जताए जाने के मद्देनजर विधेयक को व्यापक परामर्श के लिए वह संयुक्त समिति को भेजना चाहती है।
संयुक्त संसदीय समिति राज्य सरकारों और शैक्षणिक निकायों सहित हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने के बाद अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देगी।
भाषा मनीषा माधव
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