राज्यसभा में निर्दलीय सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने ''ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम'' के नियमन की मांग की
अविनाश
- 10 Feb 2026, 04:20 PM
- Updated: 04:20 PM
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को निर्दलीय सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने बच्चों के लिए डिजिटल मंच को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ऑनलाइन गेमिंग के विकास से लेकर 'स्ट्रीमिंग' तक पूरे तंत्र को विनियमित करने की सरकार से मांग की।
सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए शर्मा ने 'ई-स्पोर्ट्स' को आधिकारिक खेल का दर्जा देने की भी मांग की, जिसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
शर्मा ने कहा, "डिजिटल क्षेत्र में जितनी संभावनाएं हैं उतने ही खतरे भी हैं। मैं इलेक्ट्रॉनिक गेमिंग की दुनिया की बात कर रहा हूं। जब हम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं तो हमें 'ऑरेंज इकॉनोमी' को पहचानना होगा। हमारा रचनात्मक और डिजिटल क्षेत्र अब हाशिये का उद्योग नहीं रहा, बल्कि एक हजार अरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का एक अहम स्तंभ बन चुका है।"
उन्होंने कहा कि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का मूल्य लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर है और यह देश की कार्यशील आबादी के करीब आठ प्रतिशत को रोजगार प्रदान करती है।
शर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र के भीतर दो अलग-अलग वास्तविकताओं के बीच अंतर करना जरूरी है। उन्होंने कहा, "एक ओर अनियमित शौकिया गेमिंग का संकट और उसका प्रभाव सामने आ रहा है। अनियंत्रित ऑनलाइन गेमिंग के फैलाव के गंभीर परिणाम देखने को मिले हैं।" उन्होंने गेम की लत के कारण कुछ बच्चों की मौत का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि नैदानिक अध्ययनों से अब यह स्पष्ट हुआ है कि अत्यधिक और अनियमित गेमिंग का बच्चों और युवाओं में तनाव, बेचैनी, तीव्र चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से सीधा संबंध है।
शर्मा ने कहा, "केवल सांसद के तौर पर नहीं बल्कि एक अभिभावक के रूप में, मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि गेम विकास से लेकर स्ट्रीमिंग तक पूरे इकोसिस्टम को विनियमित किया जाए और गेम ऑडिट अनिवार्य किए जाएं, ताकि ये डिजिटल प्लेटफॉर्म हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित हों।"
उन्होंने सुरक्षित और अनुकूल इकोसिस्टम तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
शर्मा ने कहा कि पेशेवर 'ई-स्पोर्ट्स' की अपार संभावनाएं हैं, जो अब तक काफी हद तक अप्रयुक्त बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा, "देश में लाखों गंभीर और अत्यधिक कुशल इलेक्ट्रॉनिक गेमर हैं, जो इस कला के प्रति समर्पित हैं। भारत में इस समय 50 करोड़ शौकिया गेमर हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ा गेमिंग दर्शक वर्ग है, और लाखों पेशेवर गेमर भी हैं।"
उन्होंने कहा कि भारत का गेमिंग बाजार वर्तमान में लगभग 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसके 2030 तक बढ़कर 10 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि ''एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स'' (एवीजीसी) क्षेत्र को अकेले 2030 तक लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी।
शर्मा ने कहा, "यह हमारे युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर है, विशेषकर गेम डिजाइन, विकास और पेशेवर लीग की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि ई-स्पोर्ट्स को आधिकारिक खेल का दर्जा दिया जाए, क्योंकि इन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ओलंपिक और अन्य निकायों द्वारा भी स्वीकार किया जा रहा है।"
शून्यकाल में ही अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरई ने मांग की कि कर्नाटक की तरह तमिलनाडु में भी वाल्मीकि समुदाय को जनजाति का दर्जा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने विधानसभा में वाल्मीकि समुदाय को जनजाति श्रेणी में शामिल करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।
वर्तमान में तमिलनाडु में वाल्मीकि समुदाय को पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद ने देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की कथित बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान हजारों लोगों की सेवा इसलिए नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसके पास समुचित संसाधन नहीं हैं।
शून्यकाल में ही आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी, मनोनीत सतनाम सिंह संधु, तृणमूल कांग्रेस के नदीमुल हक और राष्ट्रीय जनता दल के ए डी सिंह ने भी आसन की अनुमति से अपने-अपने मुद्दे उठाए।
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मनीषा अविनाश
अविनाश
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