एआईआईए-गोवा : मादक पदार्थों का सेवन करने वालों के लिए मददगार साबित हो रहा है आयुर्वेद
नरेश
- 08 Feb 2026, 04:54 PM
- Updated: 04:54 PM
नयी दिल्ली/पणजी, आठ फरवरी (भाषा) गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में आयुर्वेद, मनोचिकित्सा, योग, आहार और पुनर्वास चिकित्साओं के जरिये उन लोगों की मदद की जा रही है जो मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा शराब और तंबाकू की लत से जूझ रहे हैं।
एआईआईए-गोवा में चलाए जा रहे नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जरिये यह मदद की जा रही है।
संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. प्रजापति ने कहा उत्तरी गोवा के धारगालिम परिसर में पिछले तीन वर्षों से संचालित यह कार्यक्रम, एक समर्पित मानसरोग और नशामुक्ति बाह्य रोगी विभाग के माध्यम से चलाया जाता है। इसके जरिये शराब और तंबाकू की लत के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को विशेष सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
वर्ष 2025 में, बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में शराब पर निर्भरता के 109 बाह्य रोगी मामले तथा निकोटीन और तंबाकू की लत से संबंधित 44 मामले दर्ज किए गए।
एआईआईए-गोवा में मरीजों को व्यापक देखभाल प्रदान की जाती है, जिसमें पंचकर्म के माध्यम से प्रबंधन, यकृत-केंद्रित हस्तक्षेप, योग, नशामुक्ति परामर्श, पारिवारिक परामर्श और संरचित अनुवर्ती कार्रवाई शामिल हैं।
एआईआईए-गोवा की डीन डॉ. सुजाता कदम ने कहा, ''इस कार्यक्रम की एक प्रमुख ताकत इसका एकीकृत दृष्टिकोण है, जिसमें मादक पदार्थों की लत और उससे जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए शास्त्रीय आयुर्वेदिक सिद्धांतों को नैदानिक मूल्यांकन उपकरणों, चिकित्सीय योग, पथ्याहार (संपूर्ण आहार) और परामर्श के साथ लागू किया जाता है।''
डॉ. कदम ने बताया कि इस केंद्र की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि यहाँ एक आंतरिक मनोचिकित्सक उपलब्ध है जो 'कायचिकित्सा' विशेषज्ञों के साथ घनिष्ठ समन्वय में काम करता है। इससे संबंधित मनोवैज्ञानिक लक्षणों और पुनरावृत्ति के जोखिम की शीघ्र पहचान और प्रबंधन संभव हो पाता है।
उन्होंने बताया कि नशामुक्ति कार्यक्रम में पंचकर्म चिकित्सा पद्धतियों की एक श्रृंखला शामिल है, जो रोगी की नैदानिक अवस्था और लक्षणों की गंभीरता के अनुरूप तैयार की जाती है।
इन उपायों में विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग शामिल है जिनका उद्देश्य लालसा को कम करना, वापसी के लक्षणों को स्थिर करना और चयापचय संतुलन को बहाल करना है।
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