न्यायालय ने छात्र के निष्कासन के खिलाफ याचिका पर मध्यप्रदेश सरकार और अन्य से जवाब मांगा
दिलीप
- 06 Feb 2026, 09:57 PM
- Updated: 09:57 PM
नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इंदौर के एक स्कूल से निष्कासित किए गए एक नाबालिग लड़के के पिता द्वारा दायर याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार और अन्य से जवाब मांगा है।
आरोप है कि लड़के ने शिक्षकों के बारे में एक आपत्तिजनक मीम प्रसारित किया था।
न्यायालय ने उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें स्कूल द्वारा 13 वर्षीय छात्र को शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान कक्षा नौवीं से निष्कासित किए जाने के फैसले को बरकरार रखा गया था।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने टिप्पणी की कि नाबालिग सामान्यतः अपने आसपास के वातावरण से इस तरह का व्यवहार सीखते हैं और सांप्रदायिक भाव वाले मीम्स को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता निपुण सक्सेना ने कहा कि कथित कृत्य के लिए दी गई सजा पूरी तरह असंगत और अनुपातहीन है, जबकि यह भी सिद्ध नहीं हुआ कि संबंधित मीम नाबालिग छात्र ने ही बनाया या साझा किया था।
सक्सेना ने बताया कि जिस इंस्टाग्राम अकाउंट से मीम साझा किया गया, वह निजी था और इस अकांउट को कम से कम तीन बच्चे संचालित कर रहे थे तथा उन सभी को स्कूल से निष्कासित कर दिया गया।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को निर्धारित की।
याचिका में कहा गया है कि स्कूल की इस कार्रवाई से याचिकाकर्ता के बेटे को गंभीर नुकसान हुआ है, क्योंकि इससे कक्षा दसवीं तक उसकी पढ़ाई जारी रखना बेहद कठिन हो गया है।
याचिका के अनुसार, आईसीएसई बोर्ड के मौजूदा उपनियमों के तहत कक्षा दसवीं का पंजीकरण आमतौर पर कक्षा नौवीं के दौरान ही पूरा कर लिया जाता है।
याचिका में कहा गया, "विवादित निर्णय ने याचिकाकर्ता के बेटे की शिक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया है।"
इसमें आरोप लगाया गया कि स्कूल की 'प्रतिष्ठा की रक्षा' का दावा भ्रामक है, क्योंकि संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट न तो सार्वजनिक था और न ही स्कूल प्रशासन के लिए सुलभ था।
याचिका में कहा गया, "ऐसे मीम के लिए, जिन्हें बच्चे से जोड़ा भी नहीं जा सकता, किसी नाबालिग को निष्कासन जैसी कठोर सजा देना और 'निवारक दंड' के आपराधिक सिद्धांत को लागू करना स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।"
याचिकाकर्ता ने पिछले वर्ष अपने बेटे को स्कूल से निष्कासित किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
भाषा
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