इंदौर पेयजल त्रासदी : आपत्तिजनक रील पर मामला दर्ज होने के बाद 'इन्फ्लुएंसर' ने माफी मांगी
राजकुमार
- 04 Feb 2026, 10:27 PM
- Updated: 10:27 PM
इंदौर (मध्यप्रदेश), चार फरवरी (भाषा) इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत के मामले में स्थानीय लोकसभा सदस्य शंकर लालवानी के खिलाफ इंस्टाग्राम की रील में कथित रूप से आपत्तिजनक और असत्य टिप्पणियां करने पर मामला दर्ज होने के बाद एक 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर' ने बुधवार को माफी मांग ली।
इस व्यक्ति ने कहा कि उसने 'जानकारी के अभाव' और 'भूल' के चलते रील में अपशब्दों का इस्तेमाल किया था।
'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर' जतिन शुक्ला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी करके माफी मांगी। शुक्ला ने वीडियो में कहा कि इंदौर की पेयजल त्रासदी पर बनाई गई रील में उन्होंने जानकारी के अभाव और भूल के चलते लालवानी के प्रति कुछ अपशब्दों का प्रयोग किया था, लेकिन उनका मकसद स्थानीय सांसद की छवि धूमिल करना या उनका अपमान करना नहीं था।
उन्होंने कहा,''मेरे शब्दों से सांसद की भावनाएं आहत हुईं। इसके लिए मैं सांसद और आप सबसे क्षमा मांगता हूं।''
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि सांसद प्रतिनिधि विशाल गिदवानी की शिकायत पर अपराध निरोधक शाखा में शुक्ला के खिलाफ 30 जनवरी को मामला दर्ज किया गया था।
उन्होंने बताया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (किसी लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किया गया आदेश नहीं मानना) और धारा 352 (किसी व्यक्ति द्वारा शांति भंग करने के इरादे से अपशब्दों का जान-बूझकर इस्तेमाल करना) के तहत दर्ज किया गया था।
दंडोतिया ने प्राथमिकी के हवाले से कहा कि शुक्ला की रील में स्थानीय लोकसभा सांसद के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक, असत्य और भ्रामक टिप्पणियां की गई थीं।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाने पर कानूनी रोक लगा रखी है और 'इन्फ्लुएंसर' ने इस आदेश का उल्लंघन किया।
प्राथमिकी में कहा गया है कि शुक्ला ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के संबंध में लालवानी पर एक रील में 'निराधार आरोप' लगाए।
प्राथमिकी के मुताबिक रील में कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग करते हुए यह झूठा दावा भी किया गया कि इन मौतों के बाद 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर' इंदौर आया था और उसकी शहर में सांसद के साथ मुलाकात हुई थी।
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। कांग्रेस ने इस प्रकोप में अब तक 32 लोगों की मौत का दावा किया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 27 जनवरी को राज्य सरकार की पेश 'डेथ ऑडिट' रिपोर्ट में संभावना जताई गई थी कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैली उल्टी-दस्त से हो सकता है।
अदालत ने दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक सदस्यीय आयोग गठित किया है।
भाषा हर्ष
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