बीएनएस की धारा 69 में धोखाधड़ी के लिए दंड है, न कि निराशा के लिए: उच्च न्यायालय
राजकुमार
- 03 Feb 2026, 10:47 PM
- Updated: 10:47 PM
प्रयागराज (उप्र), तीन फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी का झूठा बहाना बनाकर यौन संबंध स्थापित करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी यह कहते हुए रद्द कर दी है कि बीएनएस की धारा 69 में धोखाधड़ी के लिए दंड का प्रावधान है न कि निराशा के लिए।
हालांकि उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि अन्य धाराओं में जांच जारी रह सकती है, लेकिन याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी (लड़की) ने परस्पर सहमति से संबंध बनाए थे न कि शादी के झूठे बहाने के कारण, इसलिए, प्राथमिकी तब दर्ज कराई गई जब पहले से तय शादी कुछ मतभेदों के कारण टूट गई।
याचिकाकर्ताओं- नीलेश राम चंदानी, उनके पिता और अन्य की रिट याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने कहा, "हमारा निश्चित तौर पर यह विचार है कि बीएनएस की धारा 69 में धोखाधड़ी के लिए दंड का प्रावधान है न कि निराशा के लिए।"
अदालत ने कहा, "मौजूदा मामले में हम पाते हैं कि दोनों पक्षों के बीच शादी का समझौता था और प्रथम याचिकाकर्ता द्वारा प्रतिवादी (लड़की) से निकट भविष्य में शादी करने का कोई एकतरफा या कपटपूर्ण वादा नहीं किया गया था।"
अदालत ने कहा, "हमारा यह भी मानना है कि प्राथमिकी दर्ज कराने का समय ऐसा था जोकि प्रतिवादी के अनुकूल नहीं था। प्राथमिकी ऐसे समय में दर्ज कराई गई जब प्रथम याचिकाकर्ता ने सोचा कि किसी कारण से शादी करना संभव नहीं है।"
अदालत ने कहा, "बीएनएस की धारा 69 के तहत एक अपराध के लिए दो घटक आवश्यक हैं। पहला कि यदि एक व्यक्ति कपटपूर्ण साधन अपनाकर एक महिला के साथ यौन संबंध स्थापित करता है या बिना शादी के इरादे से उस महिला के साथ शादी करने का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाता है।"
प्रतिवादी (लड़की) ने याचिकाकर्ता, उसके पिता और अन्य लोगों के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर 63 स्थित थाने में 24 दिसंबर को बीएनएस की धारा 69 एवं कुछ अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसके बाद, इन याचिकाकर्ताओं ने एक अंतरिम उपाय के तहत पुलिस को उक्त प्राथमिकी के आधार पर गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध करते हुए यह रिट याचिका दायर की।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने 29 जनवरी, 2026 को उक्त आदेश दिया।
भाषा सं राजेंद्र राजकुमार
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