तुर्कमान गेट हिंसा: अदालत ने पथराव मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की
शोभना
- 03 Feb 2026, 05:03 PM
- Updated: 05:03 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जनवरी की शुरुआत में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुए पथराव के मामले में मंगलवार को तीन आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई की।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह तीन आरोपियों मोहम्मद अरीब, मोहम्मद नावेद और मोहम्मद अतहर द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने दलील दी कि छह और सात जनवरी की दरमियानी रात को घटना स्थल पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (गैरकानूनी सभाओं पर रोक) लागू थी, फिर भी आरोपी प्रतिबंधों और जारी अतिक्रमण हटाओ अभियान की पूरी जानकारी होने के बावजूद जमा हुए।
श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के सिर व शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को निशाना बनाते हुए पथराव किया, यह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत अपराध बनता है।
आरोपी अरीब के वकील ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, उनका मुवक्किल रात करीब सवा एक बजे अपने कार्यस्थल पर था और अगली फुटेज में उसे देर रात करीब तीन बजे अपने घर के बाहर देखा गया, घटना स्थल के निकट दोनों स्थानों की मौजूदगी को देखते हुए उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति का उस इलाके में होना स्वाभाविक था।
बचाव पक्ष के वकील ने अरीब के मोबाइल फोन में हिंसा भड़काने वाली सामग्री होने के आरोपों का खंडन किया।
उन्होंने कहा कि अरीब ने उर्दू भाषा में कुछ सामग्री प्रसारित की थी, जिससे अभियोजन पक्ष को लगा कि वह हिंसा भड़का रहा है लेकिन यह केवल एक अनुमान था और अतिक्रमण स्थल पर हुई झड़प से इसका कोई संबंध नहीं था।
हालांकि, अतिरिक्त लोक अभियोजक ने बताया कि अरीब ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों द्वारा स्थल को तोड़े जाने का एक वीडियो व्हाट्सऐप ग्रुप पर डाला था ताकि लोगों को उकसाया जा सके।
बचाव पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि अरीब के पथराव में शामिल होने का कोई विशिष्ट सीसीटीवी फुटेज या तस्वीरें नहीं हैं, जिससे धारा 109 बीएनएस के तहत आरोप लगाए जाने पर संदेह पैदा होता है।
आरोपी अमहर के वकील ने भी दलील दी कि उनके मुवक्किल की सक्रिय भागीदारी का कोई सबूत नहीं है और न ही कोई सीसीटीवी फुटेज है, जो उन्हें घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद दिखाती हो। अदालत पांच फरवरी को शेष दलीलें सुनेगी।
अदालत ने अतिरिक्त लोक अभियोजक को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसका बचाव पक्ष के वकील अगली सुनवाई तक खंडन दाखिल करेंगे।
तुर्कमान गेट के पास हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एक अलग सत्र न्यायालय ने 24 जनवरी को आरोपी उबेदुल्ला को जमानत दे दी।
भाषा जितेंद्र शोभना
शोभना
0302 1703 दिल्ली