'डिजिटल इंडिया' कहीं 'जॉबलेस इंडिया' न बन जाए: रास में कांग्रेस सदस्य ने जताई आशंका
अविनाश
- 02 Feb 2026, 02:58 PM
- Updated: 02:58 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को वर्तमान की सचाई करार देते हुए राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस के एक सदस्य ने कहा कि सरकार को एआई पर तत्काल श्वेतपत्र जारी करना चाहिए और भविष्य के लिए बेहतर रणनीति बनानी चाहिए ताकि 'डिजिटल इंडिया' कहीं 'जॉबलेस इंडिया' न बन जाए।
शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के अशोक सिंह ने आईटी क्षेत्र से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि दशकों से यह क्षेत्र रोजगार का इंजन कहलाता था लेकिन आज यह ठप हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की मध्यम वर्गीय आकांक्षाओं की रीढ़ कहलाने वाला यह क्षेत्र आज संकट के दौर से गुजर रहा है क्योंकि इस पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई हावी होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश की दिग्गज बड़ी पांच आईटी कंपनियों ने नयी भर्ती नहीं की। इतिहास में पहली बार कई आईटी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बजाय घटी है।
सिंह ने कहा कि 2024-25 में देश की दिग्गज बड़ी पांच आईटी कंपनियों में लगभग 18,000 लोगों को नियुक्त किया गया था लेकिन 2025 की शुरूआत में केवल 1700 लोगों को ही रोजगार मिला है। 'कैंपस प्लेसमेंट' का तो लगभग अंत ही हो गया है।
उन्होंने कहा ''एआई भविष्य का खतरा नहीं बल्कि वर्तमान की सचाई है। एआई की वजह से उत्पादकता बढ़ने के कारण अब कंपनियां 25 फीसदी कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं।''
सिंह ने कहा कि सरकार को इस बारे में ध्यान देना होगा कि उन इंजीनियरों का भविष्य अंधकारमय न हो जाए जिनकी डिग्रियां एआई के दौर में बेकार साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा ''डिजिटल इंडिया कहीं जॉबलेस इंडिया न बन जाए। युवाओं को 'डिजिटल इंडिया' के नारों से नहीं पाल सकते। एआई क्षेत्र लगातार फैल रहा है। सरकार एआई पर तत्काल श्वेतपत्र जारी करे और भविष्य के लिए बेहतर रणनीति बनाए।''
शून्यकाल में ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के डॉ सरफराज अहमद ने वंदे भारत ट्रेन से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस को देवघर तथा कोडरमा में भी रोका जाना चाहिए ताकि वहां की बहुत बड़ी आबादी को आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर बिहार का पटना और कोलकाता से सीधा संपर्क भी बढ़ेगा।
भाजपा के डॉ के लक्ष्मण, रामभाई हरजीभाई मोकारिया, बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने, लक्ष्मीकांत बाजपेयी और मनोनीत हर्षवर्द्धन श्रंगला ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।
भाषा
मनीषा अविनाश
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