सात हाई-स्पीड और एक नया माल ढुलाई कॉरिडोर परिवहन क्षेत्र में बदलाव लाएगा: वैष्णव
सुरेश
- 01 Feb 2026, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और एक माल ढुलाई कॉरिडोर लोगों के लिए वरदान साबित होंगे तथा देश के परिवहन क्षेत्र में बदलाव लाएंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले सात हाई-स्पीड कॉरिडोर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के डानकूनि और गुजरात के सूरत के बीच एक नए माल ढुलाई कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा।
सीतारमण के अनुसार, प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच विकसित किए जाएंगे।
वैष्णव ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने रेलवे के लिए 27 लाख करोड़ रुपये की सहायता और कुल 29 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की घोषणा की है। इसमें से 12 लाख करोड़ रुपये यात्रियों और परिचालन सुरक्षा में सुधार के लिए निवेश किए जाएंगे।
वैष्णव ने कहा, "रेलवे सुरक्षा पर विशेष ध्यान देता है।"
उन्होंने बताया कि इस केंद्रित दृष्टिकोण से ट्रेन दुर्घटनाओं में 95 प्रतिशत की कमी आई है।
मंत्री ने कहा कि विभिन्न रेलवे विभाग पटरियों, इंजन और कोच के रखरखाव के साथ-साथ कवच, सीसीटीवी कैमरे और स्टेशन के पुनर्निर्माण के माध्यम से सुरक्षा उपायों को और मजबूत करेंगे।
वैष्णव ने कहा, "ग्राहक सेवा और यात्री सुविधाओं में और सुधार किया जाएगा।"
वैष्णव ने बजट में घोषित सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के बारे में बात करते हुए कहा कि इनसे देश के परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
उन्होंने मुंबई और अहमदाबाद के बीच चल रहे पहले हाई-स्पीड कॉरिडोर की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें तेजी से सुधार हो रहा है।
वैष्णव के अनुसार, चेन्नई-बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर एक दक्षिणी हाई-स्पीड त्रिकोण का निर्माण करेंगे, जिससे केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना राज्यों के साथ-साथ केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी को भी लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि चेन्नई-बेंगलुरु, बेंगलुरु-हैदराबाद और चेन्नई-हैदराबाद के बीच यात्रा का समय क्रमशः एक घंटा 13 मिनट, दो घंटे और दो घंटे 55 मिनट तक कम हो जाएगा।
वैष्णव ने कहा, ''ये हाई-स्पीड कॉरिडोर विकास के प्रमुख कारक साबित होंगे, जो देश के साथ-साथ इन राज्यों के लिए भी फायदेमंद है।''
मुंबई-पुणे हाई-स्पीड कॉरिडोर के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 48 मिनट रह जाएगा, जबकि पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर से यात्रा का समय घटकर एक घंटा 55 मिनट हो जाएगा।
उत्तर भारत में हाई-स्पीड कॉरिडोर के बारे में जानकारी देते हुए वैष्णव ने बताया कि लोग दिल्ली से वाराणसी के बीच की यात्रा मात्र तीन घंटे 50 मिनट में कर सकेंगे।
उन्होंने कहा, "वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी की यात्रा केवल दो घंटे 55 मिनट में की जा सकेगी।"
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच एक नया आर्थिक कॉरिडोर बनेगा, जिससे काफी लाभ होगा। ये सभी सात कॉरिडोर की लंबाई लगभग 4,000 किलोमीटर होगी और इसमें 16,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा।
वैष्णव ने पश्चिम बंगाल और गुजरात के बीच बनने वाले नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे के फायदों पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पूर्व-पश्चिम माल ढुलाई गलियारा 2,052 किलोमीटर लंबा होगा और गुजरात में मौजूदा पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे से जुड़ेगा।
टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग के प्रबंध निदेशक सुदीप्ता मुखर्जी ने कहा, "सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को 'विकास कनेक्टर' के रूप में घोषित करने के साथ-साथ डानकूनि और सूरत के बीच एक नए माल ढुलाई कॉरिडोर से यात्रियों की आवाजाही, माल ढुलाई दक्षता और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।"
रेल पटरी निर्माण कंपनी पंड्रोल राही टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक प्रदीप खैतान ने कहा, ''कुल मिलाकर यह बजट सुरक्षा, विश्वसनीयता और स्वदेशीकरण पर केंद्रित प्रौद्योगिकी-आधारित रेल अवसंरचना कंपनियों के लिए एक स्थिर और भविष्योन्मुखी वातावरण तैयार करता है।"
कॉन्कॉर्ड कंट्रोल सिस्टम्स लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक गौरव लाथ ने कहा, "यह अभूतपूर्व निवेश भारत की दीर्घकालिक गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स रणनीति की रीढ़ के रूप में रेलवे को और मजबूत करता है।"
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