'उड़ान योजना' बंद करना बेटियों के साथ अन्याय: डोटासरा
खारी
- 01 Feb 2026, 03:40 PM
- Updated: 03:40 PM
जयपुर, एक फरवरी (भाषा) कांग्रेस की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 'उड़ान योजना' बंद करने को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि यह कदम प्रदेश की बेटियों के साथ ''अन्याय'' है।
डोटासरा ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''कांग्रेस सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा को प्राथमिकता देते हुए 2021 में ऐतिहासिक निर्णय करते हुए राजस्थान में 'उड़ान योजना' शुरू की थी जिसके तहत प्रदेश की 1.45 करोड़ महिलाओं और छात्राओं को हर महीने 12 नि:शुल्क 'सेनेटरी नैपकिन' उपलब्ध कराए।''
उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना।
कांग्रेस नेता ने कहा, ''लेकिन भाजपा सरकार ने पिछली सरकार की इस जनहितैषी योजना को बंद कर दिया।...ये जानकार पीड़ा होती है कि प्रदेश की बेटियां कपड़े और मौजे का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।''
उन्होंने दावा किया इससे बेटियों की पढ़ाई व सेहत पर असर पड़ रहा है और वे स्कूल छोड़ने को विवश हो रही हैं।
सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ से विधायक डोटासरा ने कहा, ''सीकर जिले के 39 सरकारी स्कूलों में आज भी बच्चियों के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं, पिछले तीन वर्षों में 19 हजार बच्चियां को सरकारी स्कूल छोड़ना पड़ा।''
उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उच्चतम न्यायालय ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर ऐतिहासिक और सख्त आदेश दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ''अदालत ने स्पष्ट कहा है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए कि महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित शौचालय अनिवार्य रूप से हों, हर स्कूल में नि:शुल्क 'सेनेटरी पैड' उपलब्ध कराए जाएं।''
उन्होंने सवाल किया, ''जब कांग्रेस सरकार ने पहले ही उच्चतम न्यायालय की भावना के अनुरूप 'उड़ान योजना' शुरू कर दी थी, तो भाजपा सरकार ने उसे क्यों बंद किया? भाजपा ने बेटियों की सेहत, शिक्षा और गरिमा को सियासी हठधर्मिता की भेंट क्यों चढ़ाया?
मुख्यमंत्री से इस योजना को बहाल करने की मांग करते हुए डोटासरा ने कहा कि हर स्कूल में अलग शौचालय और नि:शुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए और उच्चतम न्यायालय के आदेशों का ईमानदारी से पालन किया जाए।
भाषा बाकोलिया नेत्रपाल खारी
खारी
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