वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित प्रमुख प्रावधान
अजय
- 01 Feb 2026, 02:05 PM
- Updated: 02:05 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 पेश किया। इस बजट भाषण के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं---
- आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं।
- वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) सौदों पर लगने वाले प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को बढ़ाकर क्रमशः 0.05 प्रतिशत और 0.15 प्रतिशत किया गया।
- विदेशी पर्यटन पैकेज की बिक्री पर 'स्रोत पर कर संग्रह' (टीसीएस) की दर को दो प्रतिशत किया गया।
- उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्च पर टीसीएस को भी दो प्रतिशत किया गया।
- नया आयकर अधिनियम, 2025 इस साल एक अप्रैल से लागू होगा, नियम और फॉर्म जल्द जारी होंगे।
- बिना ऑडिट वाले व्यवसायों के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की तारीख अगस्त 31 तक बढ़ाई गई।
- विदेशी कंपनियों को भारत के डेटा सेंटर से वैश्विक सेवाएं प्रदान करने पर 2047 तक मिलेगा 'कर अवकाश।'
- वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य, जो वित्त वर्ष 2025-26 के 4.4 प्रतिशत से कम है।
- जीडीपी में ऋण का अनुपात 56.1 प्रतिशत से घटाकर 55.6 प्रतिशत किया गया।
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल बजट का आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये।
- सरकारी पूंजीगत व्यय को 11.11 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया।
- राज्यों को कर हिस्सेदारी के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित।
- शुद्ध कर संग्रह 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान।
- सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान।
- बजट का 'तीन कर्तव्य' पर ध्यान, वृद्धि की रफ्तार तेज करना, आकांक्षाओं को पूरा करना, और सबका साथ, सबका विकास।
- सुधारों के 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत 350 से अधिक सुधार लागू।
- एसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये का वृद्धि कोष बनाने का प्रस्ताव, भविष्य के चैंपियन बनाने का लक्ष्य।
- सीमाशुल्क के लिए विश्वास-आधारित प्रणाली, पूर्व-निर्धारित कर निर्णय (एडवांस रुलिंग) की वैधता अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाई गई।
- सेवा क्षेत्र का योगदान वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने के लिए उच्चस्तरीय के गठन का प्रस्ताव।
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