न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले में आदेशों का पालन नहीं करने पर चिंता जतायी
अविनाश
- 28 Jan 2026, 08:33 PM
- Updated: 08:33 PM
नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आवारा कुत्तों के बंध्याकरण मामले में राज्य सरकारों की क्षमता बढ़ाने के निर्देशों का पालन नहीं करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "वे सभी हवाई किले बना रहे हैं।"
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने अपने पूर्व के निर्देशों के अनुपालन पर राज्यों की दलीलें सुनना शुरू किया। पीठ ने प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे "कहानी सुनाने" में लगे हुए हैं।
इस मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने विभिन्न राज्यों द्वारा की गई पहल का सारांश प्रस्तुत करते हुए कमियों को उजागर किया।
उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुरूप कदम उठाए हैं, लेकिन पूर्ण अनुपालन के लिए अब भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
उन्होंने कहा कि सरकारों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) सुविधाओं को बढ़ाना होगा, आवारा कुत्तों के बंध्याकरण में तेजी लानी होगी, कुत्तों के आश्रय स्थल स्थापित करने होंगे, संस्थागत क्षेत्रों की बाड़बंदी करनी होगी और सड़कों व राजमार्गों से आवारा जानवरों को हटाना होगा।
बिहार सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वहां 34 एबीसी केंद्र हैं। उनके अनुसार वहां 20,648 कुत्तों का बंध्याकरण किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने इसका विवरण नहीं दिया कि बंध्याकरण की दैनिक क्षमता कितनी है और यह आंकड़ा किस अवधि के लिए है।
अग्रवाल ने कहा, "राज्य को एबीसी केंद्रों का संपूर्ण ऑडिट करना चाहिए था। यदि राज्य में छह लाख से अधिक कुत्ते हैं तो 20,648 कुत्तों का बंध्याकरण बिल्कुल अपर्याप्त है।"
उन्होंने कहा, "हलफनामे में यह नहीं बताया गया है कि कितने संस्थागत क्षेत्रों में यह देखने के लिए सर्वेक्षण किया गया कि वहां बाड़, चारदीवारी आदि हैं या नहीं।"
पीठ ने कहा, "ये सभी हवाई महल बना रहे हैं। असम को छोड़कर किसी भी राज्य ने यह आंकड़ा नहीं दिया है कि आवारा कुत्तों के काटने की कितनी घटनाएं हुईं।"
हालांकि, बिहार सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार उचित व्यवस्था कर रही है और तीन महीने के भीतर पर्याप्त प्रगति होगी।
उच्चतम न्यायालय ने असम में कुत्तों के काटने की घटनाओं के आंकड़ों पर भी हैरानी जताई। न्यायालय ने कहा, "इन आंकड़ों को देखिए। ये चौंकाने वाले हैं। 2024 में 1.66 लाख घटनाएं हुईं और 2025 में (केवल जनवरी में ही) 20,900 घटनाएं दर्ज की गईं। ये बेहद भयावह है।"
पीठ ने कहा कि राज्य अस्पष्ट बयान नहीं दे सकते और सभी अस्पष्ट कथन हलफनामों पर आधारित होते हैं। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, "हम अस्पष्ट कथन देने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने जा रहे हैं।"
उच्चतम न्यायालय ने गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात की दलीलें भी सुनीं और स्कूलों व अस्पतालों में आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए संस्थागत क्षेत्रों में बाड़ लगाने के निर्देशों का अनुपालन न होने पर टिप्पणी की।
पीठ ने टिप्पणी की, "हर सार्वजनिक इमारत के चारों ओर बाड़ लगाई जानी चाहिए, न केवल आवारा कुत्तों या अन्य जानवरों से बचाव के लिए बल्कि संपत्ति को चोरी से बचाने के लिए भी।" उसने कहा कि राज्य केवल "कहानी सुनाते रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।"
अग्रवाल ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना द्वारा उठाए गए कदमों का सारांश प्रस्तुत करेंगे।
उच्चतम न्यायालय ने इन मामलों की सुनवाई बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दी है।
उच्चतम न्यायालय ने 20 जनवरी को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर उसके आदेशों की आलोचना करने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की टिप्पणियों पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि उन्होंने अदालत की अवमानना की है।
भाषा
शुभम नरेश अविनाश
अविनाश
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