ऑपरेशन सिंदूर से संदेश दिया गया कि आतंकी हमले का निर्णायक जवाब दिया जाएगा: राष्ट्रपति मुर्मू
माधव
- 28 Jan 2026, 12:56 PM
- Updated: 12:56 PM
नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए सेना के शौर्य और पराक्रम की सराहना करते हुए बुधवार को कहा कि इस अभियान के माध्यम से सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा।
उन्होंने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि माओवादी आतंक की चुनौती 126 जिलों से घटकर आठ जिलों तक सिमट गई है तथा वह दिन दूर नहीं जब माओवादी आतंक देश से पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
मुर्मू ने कहा, ''श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया है - 'भय काहू को देत नय, नय भय मानत आन' यानी हम ना किसी को डराएं, और ना किसी से डरकर जिएं। इसी निडर मन से, इसी भावना से देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग उत्तरदायित्व और विवेक के साथ किया जा सकता है।''
उनका कहना था, ''ऑपरेशन सिंदूर से विश्व ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा है। हमारे देश ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकियों के अड्डों को ध्वस्त कर दिया। सरकार ने कड़ा संदेश दिया कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा।''
उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौते को स्थगित किया जाना भी आतंकवाद के विरुद्ध देश की लड़ाई का हिस्सा है तथा देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम हो रहा है।
राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख भी किया कि सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षाबलों ने माओवादी आतंक पर भी निर्णायक कार्रवाई की है।
मुर्मू ने कहा, ''वर्षों तक देश के 126 जिलों में असुरक्षा, भय और अविश्वास का वातावरण था। माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों का भविष्य अंधकार में डाल दिया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान हमारे युवाओं, आदिवासी और दलित भाई-बहनों को हुआ।''
उन्होंने कहा, ''आज माओवादी आतंक की चुनौती 126 जिलों से घटकर आठ जिलों तक सिमट गई है। इनमें भी तीन जिले ही ऐसे हैं, जो गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इस एक साल में माओवाद से जुड़े लगभग दो हजार लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। इससे लाखों नागरिकों के जीवन में शांति लौटी है।''
राष्ट्रपति ने कहा कि माओवाद से प्रभावित रहे इलाकों में परिवर्तन को आज पूरा देश देख रहा है।
उनका कहना था, ''बीजापुर के एक गांव में 25 साल बाद बस पहुंची तो लोगों ने किसी उत्सव की तरह खुशी मनाई। बस्तर ओलंपिक में युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। हथियार छोड़ चुके व्यक्ति अब जगदलपुर के पंडुम कैफे में लोगों की सेवा कर रहे हैं।''
मुर्मू ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जो लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा से जुड़े हैं, उनका जीवन पटरी पर लौटे। उन्होंने वो दिन दूर नहीं है, जब देश से माओवादी आतंक पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।
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