असम के लोगों को वोट बैंक की राजनीति और विकास के बीच चयन करना होगा: हिमंत
नरेश
- 26 Jan 2026, 04:21 PM
- Updated: 04:21 PM
डिब्रूगढ़, 26 जनवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि लोगों के लिए सोचने और यह चयन करने का समय आ गया है कि वे ''वोट बैंक की राजनीति'' चाहते हैं या उनकी सरकार द्वारा पिछले पांच वर्ष में शुरू की गई विकास यात्रा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री ने यहां गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद अपने संबोधन में कहा कि अगले कुछ महीनों में राज्य में चुनाव होंगे और लोगों को यह तय करना होगा कि वे ''बांग्लादेशी मुसलमानों के सामने आत्मसमर्पण'' करना चाहते हैं या प्रगति और विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले राज्य में गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस पर हिंसा और उग्रवादी घटनाएं होती थीं लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, ''हम देश में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमने उन बांग्लादेशी मुसलमानों के सामने आत्मसमर्पण न करने का फैसला किया है जिन्होंने विशाल क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर लिया है और हमारी पहचान, संस्कृति तथा परंपराओं के लिए खतरा पैदा किया है। हमने अतिक्रमणकारियों को हटाकर अपनी जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है।''
शर्मा ने कहा कि भविष्य की पीढ़ी के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उनकी सरकार लोगों की 'माटी' (जमीन), 'भेटी' (नींव), 'संस्कृति' और 'परिचय' की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी पहचान को खतरे में न पड़ने दें और इस सरकार द्वारा शुरू की गई विकास यात्रा को आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा, ''असम को देश का अग्रणी राज्य'' बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ाने के अपने प्रयास में 'अटल', 'अविचल' और 'अग्रगामी' बने रहें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह सोचने का समय आ गया है कि राज्य के लोगों को किस तरह का असम चाहिए और क्या 'हमें हिंसा और उग्रवाद के उन काले दिनों में वापस जाना चाहिए जब बंद, धरने, बम विस्फोट और बंदूकों का बोलबाला था या हमें विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहिए'।
उन्होंने कहा कि यह अनुमान लगाया गया है कि 2027 की जनगणना के अनुसार, 'राज्य में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) से आए मुसलमानों की आबादी बढ़कर 40 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि 12 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और असम में 63.58 लाख बीघा जमीन पर घुसपैठियों ने अतिक्रमण कर लिया है।'
शर्मा ने कहा, ''2021 से पहले किसी भी सरकार ने इन विदेशियों के चंगुल से अतिक्रमित भूमि को खाली कराने की पहल नहीं की थी और इन विदेशियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।''
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा आव्रजन (असम से निष्कासन) अधिनियम को लागू करके उन्हें वापस भेजने की अनुमति देने से जिला आयुक्तों को न्यायाधिकरणों में जाए बिना 24 घंटे के भीतर विदेशियों को देश से वापस भेजने का अधिकार मिल गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ही गुवाहाटी में 'शहीद स्मारक' की स्थापना की गई।
भाषा यासिर नरेश
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