घाटी में स्थिति अब सकारात्मक; कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए बने नीति : बृजलाल भट
नरेश
- 25 Jan 2026, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
जम्मू, 25 जनवरी (भाषा) भारत सरकार द्वारा सोमवार को 'गुमनाम नायकों' की श्रेणी में घोषित पद्म श्री सम्मान विजेताओं में शामिल कश्मीरी पंडित समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ता बृज लाल भट ने कहा कि घाटी में दशकों के रक्तपात के बाद सकारात्मकता की स्पष्ट किरणें दिखाई दे रही हैं।
भट ने रेखांकित किया कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए एक व्यापक नीति की आवश्यकता है।
पूर्व नौकरशाह भट ने विश्वास व्यक्त किया कि संतुलित नीति और निरंतर प्रयासों से कश्मीर सद्भाव और सह-अस्तित्व के प्रतीक के रूप में अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त कर सकता है।
भट ने देश के चौथे शीर्ष नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा के तुरंत बाद 'पीटीआई वीडियो' से बातचीत कें कहा, ''मैंने कश्मीर में सेवा की है और मैंने उग्रवाद और आतंकवाद के चरम दौर को देखा है। मैं आतंकवाद के बढ़ते अंधकार का साक्षी रहा हूं। आज मैं उभरती हुई सकारात्मकता की किरणों का भी साक्षी हूं।''
भट ने पुराने दौर को याद करते हुए बताया कि जब वह घाटी में सरकारी कर्मचारी थे, तब वह कुछ भी नहीं कर सकते थे।
उन्होंने कहा, ''सेवानिवृत्ति के बाद मैं उस बंधन से मुक्त हुआ, तब मैंने सोचा कि मुझे कश्मीर में ही रहना चाहिए, ताकि मैं उन गलतियों को सुधारने की कोशिश कर सकूं जो हुई थीं।''
उन्होंने पुरस्कार का स्वागत करते हुए कहा कि वह इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं बल्कि उस संस्था के लिए एक मान्यता के रूप में देखते हैं जिसके लिए वे काम कर रहे हैं। वह नागदंडी में स्थित श्री रामकृष्ण मिशन आश्रम और विवेकानंद केंद्र के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''पूरे भारत में लगभग 900 शाखाओं वाले हमारे संगठन का मूल उद्देश्य मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माण है। लेकिन कश्मीर के संदर्भ में एक और उद्देश्य विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास है।''
भट ने कहा कि वे सामुदायिक संबंधों को फिर से मजबूत करने और पारंपरिक त्योहारों को मनाने, युवा सम्मेलनों और बैठकों का आयोजन करने के प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''मेरी जिम्मेदारी सभी समुदायों के युवाओं को एकजुट करना और उन्हें नागरिक समाज की पहलों से जोड़ना है। मेरा मानना है कि इसमें हमे कुछ हद तक सफलता मिली है।''
भट ने कहा कि वे विभिन्न जिलों के युवाओं को एक मंच पर लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियां भी चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में सामान्य स्थिति तब तक संभव नहीं होगी जब तक बहुसंख्यक समुदाय के युवा अल्पसंख्यक वर्गों के लोगों का स्वागत करने की पहल नहीं करते।
उन्होंने कहा, ''मैं साल में कम से कम नौ महीने कश्मीर में रहता हूं। आज की जमीनी स्थिति यह है कि लोग कहते हैं कि हिंसा से उन्हें कुछ नहीं मिला।''
भट ने कहा, ''हमें एकजुट होना होगा और जो हो चुका है उसे भूलना होगा। आइए हम पुराने कश्मीर का पुनर्निर्माण करें और उसकी शान को वापस लाएं।''
उन्होंने कहा, ''भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से एक स्पष्ट नीति आनी चाहिए। उस नीति पर विस्थापित समुदाय के साथ चर्चा की जानी चाहिए ताकि सुझाव और सुधार प्राप्त किए जा सकें। नीति में बहुसंख्यक समुदाय को भी विश्वास में लिया जाना चाहिए।''
भट ने कहा, ''जब केंद्र सरकार की ऐसी नीति बनेगी जो विस्थापितों के साथ-साथ बहुसंख्यक समुदाय को भी स्वीकार्य हो, तभी शांति और सामान्य स्थिति स्थापित होगी। तभी कश्मीर सही मायने में अपना पुराना स्वरूप प्राप्त कर सकेगा।''
भाषा धीरज नरेश
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