ध्यान भटकने से बचने के लिए स्मार्टफोन की सुविधा छोड़ने को तैयार हूं: केएलएफ में पिको अय्यर ने कहा
प्रशांत
- 25 Jan 2026, 04:53 PM
- Updated: 04:53 PM
(माणिक गुप्ता)
कोझिकोड, 25 जनवरी (भाषा) प्रसिद्ध यात्रा वृतांत लेखक पिको अय्यर का मोबाइल फोन, मीडिया और लगातार आने वाली सूचनाओं से दूर जीवन उस दुनिया में एक चौंकाने वाला अपवाद है, जो तेजी से स्मार्टफोन से बंधती जा रही है—जहां एक घंटे भी बिना किसी नोटिफिकेशन के रह जाना लोगों में 'एफओएमओ' (कुछ छूट जाने का डर) और बेचैनी पैदा कर देता है।
अपने पसंदीदा लेखक की सादगी भरी जीवनशैली से प्रभावित होकर केरल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) के नौवें संस्करण में उपस्थित दर्शकों ने अय्यर के उन अनुभवों को बहुत ध्यान से सुना जब उन्होंने मोबाइल फोन से रहित अपने जीवन जीने के तौर तरीकों के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि डिजिटल 'शोर' से दूरी कैसे उन्हें वर्तमान में पूरी तरह से जीने का अवसर देती है।
उन्होंने कहा, ''अगर कोई मुझसे छह बजे मिलने को कहता है, तो मैं छह बजे पहुंच जाता हूं - और अगर वे देर से आते हैं, तो कोई बात नहीं, क्योंकि यह मेरी गलती है कि मेरे पास मोबाइल फोन नहीं है। मैं किसी को भी इसकी सलाह नहीं देता, लेकिन ध्यान भटकाने वाली चीजों से मुक्ति पाने के लिए मैं स्मार्टफोन की सुविधा और आराम को छोड़ने को तैयार हूं।''
जापान में रहने वाले लेखक ने 'लर्निंग फ्रॉम साइलेंस' सत्र में कहा,''जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, तो मैं पूरी तरह से आप पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं, बिना जेब में कुछ भी बजने की चिंता किए या लिखित संदेश या ईमेल देखने की चिंता किए... उदाहरण के लिए, जब मैं अपनी पत्नी के साथ होता हूं, तो मैं उसे अपना पूरा ब्योरा देना चाहता हूं, उस व्यक्ति को जिसे मैंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है।''
अय्यर (68) ने 15 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और वे स्वीकार करते हैं कि इस जीवनशैली में चुनौतियां भी हैं - यहां तक कि क्यूआर कोड के माध्यम से सहज रूप से सुलभ होने वाली कमरा (रूम) लेने जैसी सेवा को प्राप्त करना भी मुश्किल हो सकता है। यद्यपि वे स्वयं ऐसे समझौते करने को तैयार हैं, अय्यर दूसरों को ऐसा करने की सलाह नहीं देते।
उन्होंने कहा, ''मैं स्मार्टफोन रखने से मिलने वाली कुछ सुविधाओं और आराम को छोड़ने के लिए तैयार हूं... मैं यह कीमत चुकाने को तैयार हूं, ताकि मुझे हर दिन और हर मिनट 600 सूचनाओं, अपडेट्स और समाचारों का बंधक न बनना पड़े।''
गौरतलब है कि वे केवल फोन से ही परहेज नहीं करते।
'टाइम', 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' और 'द फाइनेंशियल टाइम्स' जैसे प्रमुख प्रकाशनों के लिए चार दशकों से अधिक समय तक लेखन कर चुके अनुभवी पत्रकार अय्यर खुद को 'मीडिया-मुक्त' जीवन जीने वाला बताते हैं - मोबाइल फोन से दूर रहने के उनके निर्णय ने इसे और भी आसान बना दिया है।
उनका तर्क है, ''मीडिया का काम केवल हमारी चिंता, क्रोध या उत्तेजना को भड़काना है, और वास्तव में हमें व्यापक परिप्रेक्ष्य से विमुख करना है।''
उदाहरण देते हुए लेखक ने कहा कि महामारी के दौरान, उन्होंने पाया कि लगातार समाचारों का अनुसरण करने से वे केवल उन त्रासदियों से अभिभूत हो रहे थे जिनमें वे कुछ नहीं कर सकते थे जैसे कि कोविड-19 से हजारों लोगों की मौत और अन्य जगहों पर चल रहे युद्ध, जबकि उनका ध्यान उन लोगों से हट रहा था जिनकी वे सहायता कर सकते थे, जैसे कि परिवार और पड़ोस के लोग।
अय्यर ने कहा कि मीडिया से दूर रहकर उन्होंने आशा, आश्चर्य और दुनिया से एक गहरा जुड़ाव महसूस किया, जिसने उन्हें एक बेहतर दोस्त, पुत्र, पति और नागरिक बनने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की।
"हां, मैं लगभग मीडिया-मुक्त वातावरण में रहता हूं, जो पत्रकारों के लिए एक अजीब बात है। और लोग, खासकर भारत में, अक्सर इस बात से हैरान होते हैं कि एक कार्यरत पत्रकार और इतना प्रभावशाली व्यक्ति भारी-भरकम सूचना के बोझ के बिना कैसे काम कर सकता है। और मुझे लगता है कि मैं नहीं जानता कि लोग इतने भारी बोझ के साथ कैसे काम कर लेते हैं।''
'लर्निंग फ्रॉम साइलेंस' के लेखक दलाई लामा से प्रेरित हैं जिनके साथ वे उनकी जापान यात्रा के दौरान थे।
चार दिवसीय साहित्यिक उत्सव में नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुल रजाक गुरनाह और अभिजीत बनर्जी, अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स, लेखिका किरण देसाई, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता प्रतिभा राय, खेल जगत की हस्तियां रोहन बोपन्ना और बेन जॉनसन, और विकिपीडिया के संस्थापक जिमी वेल्स सहित 400 से अधिक वक्ताओं ने भाग लिया। केएलएफ-2026 का समापन 25 जनवरी को होगा।
भाषा संतोष प्रशांत
प्रशांत
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