केंद्र गैर-भाजपा शासित राज्यों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को 'कठपुतली' बना रहा: खरगे
पारुल
- 24 Jan 2026, 09:24 PM
- Updated: 09:24 PM
(फोटो के साथ)
हुबली (कर्नाटक), 24 जनवरी (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर शनिवार को आरोप लगाया कि वह कांग्रेस शासित और गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को 'कठपुतली' बना रही है।
आगामी सभी चुनावों में भाजपा के खिलाफ मतदान करने का आह्वान करते हुए खरगे ने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर निरंकुश शासन स्थापित हो सकता है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने मनरेगा को 'रद्द' करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस सरकारों ने 'अधिकार-आधारित' कानून बनाए थे, लेकिन मोदी सरकार ऐसे कानून ला रही है, जो लोगों के अधिकारों को सीमित करते हैं।
खरगे ने 'स्लम डेवलपमेंट बोर्ड' की स्वर्ण जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री आवास योजना 'सभी के लिए आश्रय' के तहत राज्यभर में मुख्यमंत्री अनुदान से निर्मित 1,80,253 घरों में से 42,345 घरों के लोकार्पण और मकान आवंटन पत्र या स्वामित्व विलेख वितरण के लिए किया गया था।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और राज्य सरकार के कई मंत्री उपस्थित थे। केंद्र सरकार पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्यपालों को निर्देश जारी कर रहे हैं।
खरगे ने कहा, ''केंद्र सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री कार्यालय के माध्यम से राज्यपालों को सीधे निर्देश देती है कि वे सिद्धरमैया या कांग्रेस सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषणों को (राज्य विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान) न पढ़ें। यह स्थिति केवल कर्नाटक में ही नहीं है, तमिलनाडु, केरल और जहां भी कांग्रेस या गैर-भाजपा सरकारें सत्ता में हैं, वहां राज्यपालों द्वारा गड़बड़ी पैदा की जा रही है।''
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि राज्यपाल निजी तौर पर यह स्वीकार करते हैं कि उन्हें 'ऊपर से' निर्देश मिलते हैं।
उन्होंने कहा, "उन्होंने (भाजपा नीत केंद्र सरकार ने) राज्यपालों को अपने हाथों की कठपुतली बना दिया है। किसी भी अच्छे काम या विधेयक पर राज्यपाल अपनी सहमति नहीं देते और उन्हें वापस भेज देते हैं। इस तरह यह सरकार (केंद्र सरकार) गलत दिशा में जा रही है।''
कर्नाटक विधानसभा में बृहस्पतिवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र में राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया और अपना पारंपरिक अभिभाषण मात्र तीन वाक्यों में समाप्त कर दिया, जिसे लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई।
यह दावा करते हुए कि कोई भी राजनीतिक दल स्थायी रूप से सत्ता में नहीं रहता, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ''देश स्थायी है।''
उन्होंने कहा कि भाजपा भी 'राष्ट्र प्रथम' की बात करती है, लेकिन केवल चुनाव के दौरान।
खरगे ने कहा, ''उनके (केंद्र सरकार) लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा पहले आते हैं, फिर देश, संविधान, लोकतंत्र...।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए, आने वाले सभी चुनावों में, चाहे छोटे हों या बड़े, भाजपा के खिलाफ वोट दें और अपनी ताकत दिखाएं, तभी जनता, गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायों में लगे लोग बच सकते हैं, अन्यथा इस देश में हिटलर, मुसोलिनी, सद्दाम हुसैन जैसा शासन आ जाएगा। यह आ चुका है।''
खरगे ने मतदाताओं से अपील की कि वे उन लोगों का समर्थन करें, जो सभी के कल्याण और सुरक्षा के लिए काम करते हैं, संघर्ष करते हैं और कानून बनाते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा, ''मोदी सरकार ने देश के लिए क्या किया है?'' उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की आलोचना करने के अलावा कुछ नहीं किया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''सुखी जीवन जीने के लिए लोगों को पेट भरने के वास्ते भोजन, सिर पर छत और काम चाहिए।'' उन्होंने पूछा, ''आपने (भाजपा सरकार ने) क्या किया है?''
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय में लाए गए मनरेगा को निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ''मनरेगा को निरस्त करके उन्होंने कोई जी-राम या कोई राम अधिनियम (वीबी जी-राम जी अधिनियम के संदर्भ में) लागू कर दिया है।''
खरगे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 41 के तहत, निर्देशक सिद्धांतों के अनुसार, मनरेगा के अंतर्गत लोगों को काम का अधिकार दिया गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे छीन लिया है। उन्होंने दावा किया कि लोगों के लिए लाभकारी मनरेगा कानून को छीन लिया गया है और उसकी जगह एक कमजोर कानून लागू कर दिया गया है।
खरगे ने कहा, ''हम उन्हें (केंद्र सरकार को) ऐसा नहीं करने देंगे। हम लड़ेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिस तरह अतीत में सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लिया था, उसी तरह 'वीबी जी राम जी अधिनियम' को भी वापस लिया जाए और गरीबों के कल्याण के लिए मनरेगा को फिर से लागू किया जाए। आप सभी इस लड़ाई के लिए तैयार रहें।''
भाषा संतोष पारुल
पारुल
2401 2124 हुबली