राज्यपाल गहलोत के कथित अपमान के विरोध में कर्नाटक विधान परिषद की कार्यवाही कई बार स्थगित की
सुरेश
- 23 Jan 2026, 09:06 PM
- Updated: 09:06 PM
बेंगलुरु, 23 जनवरी (भाषा) कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्य बी. के. हरिप्रसाद द्वारा राज्यपाल थावरचंद गहलोत के कथित अपमान को लेकर शुक्रवार को जोरदार हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी।
अब सदन की कार्यवाही 27 जनवरी को होगी।
स्थगन के बाद, परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने आदेश दिया कि हरिप्रसाद के आचरण को नैतिक समिति के पास भेजा जाए, क्योंकि संबंधित मामले में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) ने शिकायत दर्ज कराई थी।
होरट्टी ने हरिप्रसाद की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें राष्ट्रगान बजने का इंतजार किए बिना राज्यपाल के सदन से बाहर चले जाने के कथित अपमान पर चर्चा करने की बात कही गई थी।
कर्नाटक विधानमंडल के संयुक्त सत्र को बृहस्पतिवार को संबोधित करने के बाद जैसे ही गहलोत जाने लगे, हरिप्रसाद ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जबकि अन्य कांग्रेस विधायकों ने उन्हें घेरने का प्रयास किया था।
शुक्रवार को कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने राज्यपाल के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर हरिप्रसाद को सदन से निलंबित करने की मांग की।
भाजपा सदस्यों ने एक स्वर में नारे लगाते हुए कहा, ''हम गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने राज्यपाल का अपमान किया है। हरिप्रसाद को निलंबित किया जाए।''
इसके तुरंत बाद कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य एवं मंत्री हरिप्रसाद के समर्थन में आ गए और उन्होंने भाजपा के खिलाफ नारेबारी की।
विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने हंगामा कर रहे सदस्यों को शांत कराने का प्रयास किया और कुछ सदस्यों को फटकार भी लगाई।
विपक्ष के नेता सी. नारायणस्वामी ने कहा कि हरिप्रसाद का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि राज्यपाल ने राष्ट्रगान का अपमान किया और कहा कि गहलोत के जाते समय राष्ट्रगान बजाया ही नहीं गया था।
नारायणस्वामी ने कहा, ''हरिप्रसाद को सदन से निलंबित किया जाए। हम इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेंगे। राज्यपाल का अपमान संविधान का अपमान है।''
हरिप्रसाद ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यपाल को राष्ट्रगान बजने तक रुकना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इंतजार नहीं किया और चले गए। उन्होंने इसे राष्ट्रगान का अपमान बताया।
भाषा तान्या सुरेश
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