गोवा के नए तीसरे जिले की आबादी 2.2 लाख होगी, आदिवासी समुदाय के उत्थान पर होगा जोर
नरेश
- 23 Jan 2026, 04:57 PM
- Updated: 04:57 PM
पणजी, 23 जनवरी (भाषा) गोवा का नया बना तीसरा जिला कुशावती 2.20 लाख की आबादी वाला होगा, जिसमें बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के लोग शामिल हैं और इसके निर्माण को अंदरूनी तालुकाओं में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन को और करीब लाने की सरकार की कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार ने पिछले महीने तटीय राज्य में तीसरा जिला बनाने की घोषणा की जिसमें पहले उत्तर और दक्षिण गोवा जिले शामिल थे। नये जिले का नाम इस इलाके से बहने वाली एक नदी के नाम पर रखा गया है। जिले में क्वेपेम, संगुएम, कैनाकोना और धारबडोरा तालुका शामिल होंगे जो पहले दक्षिण गोवा का हिस्सा थे।
कुशावती जिले के निर्माण को एक बदलाव लाने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है जो दक्षिण गोवा के अंदरूनी तालुकाओं में रहने वाले आदिवासी समुदायों की सामाजिक और आर्थिक जिंदगी को बेहतर बना सकता है।
सरकार के मुताबिक, कुशावती में राज्य की 16 लाख की आबादी में से 2.20 लाख की आबादी है।
गोवा के समाज कल्याण मंत्री सुभाष फाल देसाई ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा कि नए जिले में शामिल इलाके पश्चिमी घाट के किनारे वाले हैं और इनमें कुनबी, वेलिप तथा धनगर जैसे एसटी समुदायों की बड़ी आबादी है।
उन्होंने कहा कि नया जिला बनने से इन समुदायों को मुख्यधारा में शामिल करने में मदद मिलेगी और सरकारी योजनाओं, कल्याणकारी कोष और विकास कार्यक्रम तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस आकांक्षी जिले के निर्माण की मंजूरी देने का ''दूरगामी कदम'' उठाने का श्रेय दिया।
स्थानीय लोगों के साथ ही कारोबारी जगत ने भी इस कदम का स्वागत किया है और प्रशासन में सुगमता तथा आर्थिक मौके मिलने का उल्लेख किया है।
दक्षिण गोवा में रहने वाले व्यापारी वरुण कुडचडकर ने कहा कि नया जिला बनने से मौजूदा दफ्तरों पर बोझ कम होगा और सेवाएं लोगों के करीब पहुंचेंगी।
क्यूपेम से कांग्रेस विधायक अल्टोन डिकोस्टा ने कहा कि कैनाकोना, संगुएम और धारबंडोरा जैसे दूर-दराज वाले तालुकाओं के लिए जिला बनाना ''समय की जरूरत'' थी।
क्यूपेम में जिला मुख्यालय बनाने के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि असली चुनौती आगे है।
विधायक ने कहा, ''इस घोषणा के बाद बेहतर सुविधाएं, कुशल प्रशासन और बेहतर जीवन स्तर होना चाहिए। दफ्तर, अदालतें और अस्पताल का बुनियादी ढांचा बनाने के लिए अगले कुछ सालों में मिलकर काम करने की जरूरत होगी।''
भाषा वैभव नरेश
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