वसंत पंचमी : धार के विवादित परिसर में हुई 'अखंड पूजा', नमाज भी अदा की गई
जितेंद्र
- 23 Jan 2026, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
धार (मध्यप्रदेश), 23 जनवरी (भाषा) वसंत पंचमी पर शुक्रवार को धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में हिंदू समुदाय के हजारों लोगों ने वाग्देवी (देवी सरस्वती) की पूजा-अर्चना की और विवादित परिसर के एक अन्य स्थान पर मुस्लिम समाज के लोगों ने नमाज भी अदा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
हिंदू त्योहार और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के मद्देनजर इस ऐतिहासिक शहर में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए करीब 8,000 की तादाद में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी।
सूर्योदय के साथ ही विवादित परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया था।
स्थानीय संगठन 'भोज उत्सव समिति' के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वाग्देवी (सरस्वती) का चित्र स्थापित करके पूजा शुरू की।
इस दौरान हवन कुंड में आहुति डाल कर 'अखंड पूजा' (सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा का लगातार चलने वाला क्रम) की शुरुआत की गई।
पूजा स्थल को फूलों की मालाओं और भगवा झंडों से सजाया गया था। विवादित परिसर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात थे।
दिन चढ़ने के साथ ही विवादित परिसर में हिंदू पक्ष के श्रद्धालुओं की तादाद बढ़नी शुरू हो गई और दोपहर 12 बजे हजारों श्रद्धालु भगवा झंडे थामे शोभायात्रा के रूप में विवादित परिसर पहुंचे। इनमें बड़ी तादाद में महिलाएं भी शामिल थीं।
अपने परिवार के साथ दर्शन करने आईं सारिका शर्मा ने कहा,"वसंत पंचमी के अवसर पर देवी सरस्वती के दर्शन करके हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हम चाहते हैं कि भोजशाला मसले का स्थायी समाधान जल्द हो।"
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी भोजशाला पहुंच कर वाग्देवी के दर्शन किए। उन्होंने कहा,"वाग्देवी का मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है।"
उन्होंने कहा कि वह वसंत पंचमी पर विवादित परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का स्वागत करती हैं।
इस बीच, धार के जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "" उच्चतम न्यायालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन में मुस्लिम समाज द्वारा नियत किए गए स्थान पर नमाज दोपहर एक बजे से तीन बजे के मध्य निर्विघ्न अदा की गई।"
हालांकि, इस बयान में नमाज में शामिल लोगों की संख्या और नमाज अदा करने के स्थान के बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया।
इस वर्ष वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने विवादित परिसर में पूजा-अर्चना और नमाज के लिए दावा किया था।
स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने बृहस्पतिवार को हस्तक्षेप किया और समय-विभाजन का स्पष्ट फॉर्मूला तय किया।
शीर्ष अदालत ने विवादित परिसर में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
भोजशाला को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था।
इस आदेश के अनुसार चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
भाषा हर्ष जितेंद्र
जितेंद्र
2301 1640 धार