कांग्रेस की पंजाब के नेताओं को चेतावनी: अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेंगे
संतोष
- 22 Jan 2026, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी की पंजाब इकाई में कलह के बीच बृहस्पतिवार को राज्य के नेताओं को चेतावनी दी कि पार्टी के अंतरिक मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी और किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है।
पार्टी नेतृत्व ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस से जुड़े नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक मंत्रणा की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास '10 राजाजी मार्ग' पर हुई एक बैठक में खरगे, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी, महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग तथा कुछ अन्य नेता शामिल हुए।
यह बैठक चन्नी का हाल में एक ऐसा वीडियो सामने आने के बाद हुई है जिससे कांग्रेस की आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई थी।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में चन्नी को पार्टी में दलितों के प्रतिनिधित्व की मांग करते हुए सुना जा सकता है।
चन्नी का हालांकि कहना है कि उन्होंने किसी विशेष जाति या समुदाय के खिलाफ कोई बात नहीं की थी। बैठक के बाद वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ''खरगे जी और राहुल जी ने पंजाब के प्रत्येक नेता के विचार सुनने में तीन घंटे बिताए। नेताओं ने पंजाब कांग्रेस की भविष्य की यात्रा के बारे में अपने विचार साझा किए। यह बहुत ही सार्थक चर्चा रही।''
उन्होंने बताया, ''कांग्रेस नेतृत्व ने आज बहुत स्पष्ट निर्देश दिया है कि आंतरिक मुद्दों पर मीडिया या सोशल मीडिया में कोई सार्वजनिक बयानबाजी नहीं की जाएगी, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा...सभी ने सर्वसम्मति से नेतृत्व के फैसले पर सहमति जताई।''
पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने दो टूक कहा, ''नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल ही नहीं है।''
चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा उठाए गए मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल का कहना था, ''हम सभी समुदायों, विशेष रूप से एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के गरीब लोगों के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध हैं। यही विचार है, यही लाइन है जो पार्टी ने पूरे भारत में अपनाई है। यह पंजाब में भी लागू है। लेकिन, मीडिया में बात करने और सोशल मीडिया पर ऐसी बातों को फैलाने से कांग्रेस संगठन को मदद नहीं मिल सकती है। यह हमारा कर्तव्य है, आलाकमान का कर्तव्य है कि सभी को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहिए। हम इसका ध्यान रखेंगे।"
उन्होंने दावा किया, ''हम पंजाब में आराम से जीतने जा रहे हैं। कांग्रेस एकजुट होकर लड़ेगी और पंजाब के लोगों के समर्थन से पंजाब में जीत दर्ज करेगी।''
कांग्रेस नेताओं ने हाथ में हाथ मिलाकर एकजुटता प्रदर्शित करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, पार्टी आलाकमान उम्मीदवार चयन, प्रचार और सभी संबंधित मामलों पर उचित समय पर निर्णय लेगा। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित है।
बघेल ने संवाददाताओं से कहा, ''आज वरिष्ठ नेताओं के साथ पंजाब से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें आने वाले वर्ष के लिए रणनीतिक चर्चा की गई। पंजाब की जनता और कार्यकर्ता सभी चाहते हैं कि यहां कांग्रेस की सरकार बने, क्योंकि पंजाब सीमावर्ती राज्य होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।''
बघेल ने कहा, ''ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि देश की आवाज सुनें और उसके अनुरूप काम करें। इसी के साथ शीर्ष नेतृत्व द्वारा अनुशासनहीनता के लिए बहुत कड़े निर्देश दिए गए हैं। पार्टी के अंदर अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने चन्नी के बयान पर नाराजगी जताई और उन्हें आगे ऐसी टिप्पणियां नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
चन्नी ने गत शनिवार को पार्टी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की बैठक को संबोधित करते हुए कहा था, "पंजाब में अगर आप यह स्वीकार करते हैं कि दलितों की आबादी 35-38 प्रतिशत है, जो कि वास्तव में है, तो हमें प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा है?"
उन्होंने कहा था, ''पंजाब (कांग्रेस) अध्यक्ष उच्च जाति से हैं, विधायक दल के नेता उच्च जाति से हैं, पंजाब कांग्रेस की महिला शाखा प्रमुख उच्च जाति से हैं, पंजाब (कांग्रेस) महासचिव उच्च जाति से हैं? हम कहां जाएं? ये लोग कहां जाएंगे?"
बाद में वडिंग ने कहा था कि अगर कोई 'जात-पात' (जातिवाद) के नाम पर राजनीति करने की सोचेगा, तो वह बर्बाद हो जायेगा।
भाषा हक माधव संतोष
संतोष
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