निजी मालगाड़ी डिब्बा विनिर्माताओं को रेल मंत्रालय से नए ऑर्डर का इंतजार
नोमान
- 22 Jan 2026, 05:08 PM
- Updated: 05:08 PM
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) रेल मंत्रालय के मालढुलाई विस्तार के महत्वाकांक्षी रोडमैप के अनुरूप पिछले करीब तीन साल में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले निजी मालगाड़ी डिब्बा विनिर्माता अब अनिश्चितता की स्थिति का सामना कर रहे हैं क्योंकि उनका कहना है कि पहला चरण पूरा होने के बाद कोई नया खरीद ऑर्डर नहीं दिया गया है।
हालांकि, रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि योजना के तहत वैगन की जरूरतों का आकलन एक सतत प्रक्रिया है और जरूरत के हिसाब से ऑर्डर दिए जाएंगे।
भारतीय रेलवे माल ढुलाई करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे बन गया है, जिसने 2024-25 में 1,61.7 करोड़ टन माल ढुलाई दर्ज की है।
साल 2022 में निर्धारित राष्ट्रीय रेल योजना (एनआरपी) के तहत, रेल मंत्रालय ने मालवहन से राजस्व बढ़ाने के लिए 2030 तक वैगन की संख्या को तीन लाख से बढ़ाकर छह लाख करने का अनुमान व्यक्त किया था।
इस योजना के तहत, मंत्रालय ने 2022 में 1,17,229 वैगन का अपना पहला बड़ा ऑर्डर दिया था जिन्हें से तीन साल में बनाया जाना था।
निजी और सरकारी, दोनों क्षेत्रों के विनिर्माताओं ने 2022-23 और 2023-24 में 37,650 वैगन की आपूर्ति की, जिसके बाद 2024-25 में 41,929 वैगन की आपूर्ति की गई, जो अब तक का सबसे अधिक है और उत्पादन में साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''लगभग सभी बड़े विनिर्माताओं ने 2025 के आखिर तक आपूर्ति पूरी कर ली है, सिवाय कुछ छोटे विनिर्माताओं को छोड़कर जो समयसीमा पर आपूर्ति नहीं कर सके।''
एनआरपी के मुताबिक, 2030 तक पांच साल में बनने वाले दो लाख से ज़्यादा वैगन का दूसरा खरीद ऑर्डर 2025-26 में तय सालाना लक्ष्य के साथ दिए जाने की उम्मीद थी।
अधिकारी ने कहा, ''इन विनिर्माताओं ने मंत्रालय की आक्रामक मालवहन योजना के आधार पर क्षमता बढ़ाई और वित्त वर्ष 2024-25 तक तीन साल में एक लाख से ज़्यादा वैगन की सफलतापूर्वक आपूर्ति की।''
उन्होंने कहा, ''हालांकि, वे अब परेशान हैं क्योंकि मंत्रालय ने अब तक दूसरा ऑर्डर देने का कोई इरादा नहीं दिखाया है।''
अधिकारियों ने बताया कि एनआरपी का उद्देश्य 2030 तक माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी मौजूदा 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत करना है। इस लक्ष्य के लिए वैगन की उपलब्धता में काफी बढ़ोतरी की जरूरत है।
अनुमानों के मुताबिक, मंत्रालय के 2025-26 और 2029-30 के बीच निजी और सरकारी विनिर्माताओं से हर साल 40,000-46,000 वैगन खरीदने की उम्मीद थी। अधिकारियों ने कहा कि इन वैगन के लिए ऑर्डर पहले ही दे दिए जाने चाहिए थे।
उद्योग विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया कि भारतीय रेलवे के लिए मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि मालवहन परिचालन से अतिरिक्त आमदनी होती है जिसका इस्तेमाल यात्री सेवाओं में रियायत के लिए किया जाता है।
भारतीय रेलवे की कुल कमाई में माल ढुलाई का हिस्सा लगभग 65 प्रतिशत है, जबकि बाकी 35 प्रतिशत यात्री सेवाओं, पार्सल आदि से आता है।
भाषा वैभव नोमान
नोमान
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