संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता: डेनमार्क की प्रधानमंत्री
नरेश
- 22 Jan 2026, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
कोपनहेगन, 22 जनवरी (एपी) डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा है कि उनका देश अपनी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं कर सकता।
यह टिप्पणी फ्रेडरिक्सन ने तब की जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने नाटो प्रमुख मार्क रुट के साथ आर्कटिक सुरक्षा पर "भविष्य के समझौते का ढांचा" तय करने पर सहमति व्यक्त की है।
ट्रंप ने कहा था कि इसका परिणाम यह होगा कि हमें ग्रीनलैंड तक ''जितनी भी सैन्य पहुंच चाहिए, वह सब मिल जाएगी''।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का दबाव बनाने के लिए आठ यूरोपीय देशों पर शुल्क लगाने की धमकी को बुधवार को वापस ले लिया। ग्रीनलैंड नाटो सहयोगी डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। इससे कुछ समय पहले ट्रंप ने कहा था कि वह द्वीप को "पूरे अधिकार, स्वामित्व और कब्जे सहित" प्राप्त करना चाहते हैं।
संभावित करार को लेकर बृहस्पतिवार को भी स्थिति बहुत अस्पष्ट रही। हालांकि ट्रंप ने फॉक्स बिजनेस को दिये एक साक्षात्कार में कहा कि ''हमें ग्रीनलैंड तक पूरी पहुंच मिलेगी। हमें वह सारी सैन्य पहुंच मिलेगी जो हम चाहते हैं।''
ट्रंप ने कहा कि यदि यह समझौता पूरा हो जाता है, तो इससे अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली 'गोल्डन डोम' को स्थापित करने की अनुमति मिल जाएगी।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्कटिक में सुरक्षा नाटो के सभी सदस्यों का मामला है, और अमेरिकी राष्ट्रपति और रुट के बीच इस पर चर्चा होना ''स्वाभाविक और उचित'' है। फ्रेडरिक्सन ने एक बयान में कहा कि उन्होंने रुट से लगातार बातचीत की है, जिसमें दावोस में ट्रंप से मुलाकात से पहले और बाद की बातचीत भी शामिल है।
उन्होंने लिखा कि नाटो डेनमार्क साम्राज्य की इस स्थिति से पूरी तरह अवगत है कि सुरक्षा, निवेश और आर्थिक मुद्दों सहित किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर बातचीत की जा सकती है - ''लेकिन हम अपनी संप्रभुता पर बातचीत नहीं कर सकते।''
उन्होंने कहा, ''मुझे सूचित किया गया है कि ऐसा नहीं है'' और साथ ही यह भी कहा कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड से संबंधित मुद्दों पर निर्णय केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही ले सकते हैं।
फ्रेडरिक्सन ने कहा कि डेनमार्क आर्कटिक में सुरक्षा को मजबूत करने के तरीकों पर सहयोगियों के साथ रचनात्मक संवाद जारी रखना चाहता है, जिसमें अमेरिकी गोल्डन डोम कार्यक्रम भी शामिल है, ''बशर्ते कि यह हमारी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए किया जाए।''
डेनमार्क ने कहा है कि अमेरिका की पहले ही ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति है और वह अपने सैन्य अड्डों का विस्तार कर सकता है। अमेरिका पहले से ही 1951 की एक संधि का पक्षकार है जो उसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सहमति से वहां सैन्य अड्डे स्थापित करने के व्यापक अधिकार प्रदान करती है।
नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि गठबंधन के महासचिव मार्क रुट ने राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ अपनी बैठक के दौरान संप्रभुता पर किसी भी प्रकार के समझौते का प्रस्ताव नहीं रखा। उन्होंने कहा कि डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच वार्ता जारी रहेगी जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड में आर्थिक या सैन्य रूप से कभी भी पैर न जमा सकें।
डेनमार्क की संसद की विदेश नीति समिति के अध्यक्ष क्रिस्टन फ्रिस बाख ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि डेनमार्क आर्कटिक में नाटो की 'मजबूत और स्थायी' निगरानी और सुरक्षा मिशन देखना चाहता है, जो पिछले साल बाल्टिक सागर में गठबंधन द्वारा शुरू किए गए बाल्टिक सेंट्री मिशन की तर्ज पर हो।
एपी धीरज नरेश
नरेश
2201 2036 कोपेनहेगन