ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे : ट्रंप
माधव
- 21 Jan 2026, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
दावोस, 21 जनवरी (एपी)अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को विश्व आर्थिक मंच की बैठक में अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करेंगे।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका तेजी से तरक्की कर रहा है, लेकिन यूरोप ''सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है''।
ट्रंप ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में सहयोगी डेनमार्क से ग्रीनलैंड का नियंत्रण हासिल करने की इच्छा जताई है। उनकी यह महत्वाकांक्षा अमेरिका के कई करीबी सहयोगियों के साथ संबंधों को खराब करने का खतरा पैदा कर रही है।
ट्रंप ने अपने संबोधन को मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और अपने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की। लेकिन वैश्विक मंच पर ट्रंप की उपस्थिति अन्य देशों के साथ उनकी शिकायतों पर अधिक केंद्रित रही।
उन्होंने बार-बार दोहराया कि ग्रीनलैंड को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका सबसे अच्छी स्थिति में है। उन्होंने इस विचार का विरोध करने के लिए यूरोप के अधिकांश देशों का उपहास किया।
राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप की दावोस की यह तीसरी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी सहयोगी ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर चिंतित हैं, जबकि लातिन अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर कब्जा करने के उनके प्रयासों से जूझ रहा है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप द्वारा अपने आठ देशों पर प्रस्तावित नए शुल्क को 'गलत' फैसला बताया और अमेरिकी राष्ट्रपति की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सबसे शक्तिशाली आर्थिक उपकरणों में से एक, जिसे बोलचाल की भाषा में व्यापार 'बाजूका' कहा जाता है, का उपयोग करके जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप ने कहा, ''हमें विश्व की रक्षा के लिए हिमखंड का एक टुकड़ा चाहिए, और वे इसे नहीं देंगे।'' उन्होंने कहा कि ''आप हां कह सकते हैं, और हम इसके लिए बहुत आभारी होंगे। या आप ना कह सकते हैं, और हम इसे याद रखेंगे।''
ट्रंप ने दावोस में अपने संबोधन के दौरान डेनमार्क से ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए अमेरिका से ''तत्काल बातचीत'' का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आर्कटिक द्वीप की अमेरिका द्वारा सुरक्षा को लेकर डेनमार्क पर ''कृतघ्नता'' का आरोप लगाया। उन्होंने यूरोपीय देश की कड़ी आलोचना की और इस बात पर जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिका को द्वीप पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है।
ट्रंप ने कहा, ''यह विशाल असुरक्षित द्वीप वास्तव में उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है। यह हमारा क्षेत्र है।''
उन्होंने कहा, ''आपको सैकड़ों फुट मोटी बर्फ से होकर गुजरना होगा। हमें इसकी जरूरत इसलिए नहीं है।''
एपी धीरज माधव
माधव
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