सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत: एसआईटी की नोएडा प्राधिकरण अधिकारियों से पूछताछ, बिल्डर न्यायिक हिरासत में
सुरेश
- 21 Jan 2026, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
नोएडा, 21 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में गिरफ्तार एक बिल्डर को बुधवार को 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता ने यह जानकारी दी।
इस बीच, विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच तेज कर दी है और लापरवाही के आरोपों का सामना कर रहे नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछताछ की है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र जयंत ने बताया कि आरोपी बिल्डरों में से एक एवं 'एमजे विजटाउन प्लानर्स' के निदेशक अभय कुमार को सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जयंत ने बताया, ''सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में लापरवाही को लेकर जमकर फटकार भी लगाई। अदालत ने कड़ी टिप्प्णी करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि जांच में ये भी साफ होना चाहिए कि लापरवाही किसकी है। नाली अगर टूटी है तो उसका जिम्मेदार कौन है। इतना ही नहीं बैरिकेड अगर नहीं लगा है तो उसका जिम्मेदार कौन है।"
उनके मुताबिक, अदालत ने कहा कि ये सब जांच का हिस्सा होना चाहिए, क्योंकि जब कुछ साल से इसको लेकर लोगों द्वारा शिकायत की जा रही थी, तो उचित समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इस बीच, सहायक पुलिस आयुक्त (ग्रेटर नोएडा) हेमंत उपाध्याय ने कहा कि प्राथमिकी में नामजद रियल एस्टेट डेवलपर 'लोटस ग्रीन्स' के दूसरे बिल्डर को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने बताया कि जांच के हिस्से के रूप में फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बुधवार को दुर्घटनास्थल से नमूने एकत्र किए।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन-सदस्यीय एसआईटी ने सेक्टर-छह स्थित नोएडा प्राधिकरण मुख्यालय में कई घंटे बिताए और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों, विशेष रूप से यातायात प्रकोष्ठ, से जुड़े लोगों से पूछताछ की।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मेरठ जोन) भानु भास्कर के नेतृत्व में गठित एसआईटी मंगलवार को नोएडा पहुंची थी। इस टीम में मेरठ के मंडलायुक्त और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता भी शामिल हैं। टीम ने सेक्टर-150 स्थित दुर्घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित के पिता राज कुमार मेहता से भी बात की।
बुधवार सुबह से ही फॉरेंसिक प्रयोगशाला और अन्य विभागों की टीमें सेक्टर-150 स्थित घटनास्थल पर सड़क और उससे सटे नाले का माप लेती नजर आईं।
अधिकारियों ने उस गहरे गड्ढे सहित पूरे इलाके का बारीकी से निरीक्षण किया, जहां से मंगलवार शाम को मृतक युवराज मेहता की कार निकाली गई थी। यह गड्ढा अब जलमग्न तालाब जैसा दिख रहा है। कार दुर्घटना के तीन दिन बाद बरामद की गई।
गुरुग्राम में काम करने वाले युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार सेक्टर-150 में एक निर्माण स्थल के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई। कथित तौर पर करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाने के बाद उनकी मौत हो गई। इस दौरान पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें घने कोहरे के बीच उन्हें बचाने की कोशिश करती रहीं, जबकि उनके बेबस पिता राज कुमार मेहता अपनी आंखों के सामने इस त्रासदी को देखते रहे।
डेवलपर्स और स्थानीय प्राधिकरण के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को हटा दिया था और घटना की एसआईटी जांच के आदेश दिए थे।
इससे पहले, सरकार ने प्राधिकरण के यातायात प्रकोष्ठ के एक कनिष्ठ अभियंता की सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
पुलिस ने मंगलवार को 'एमजे विजटाउन प्लानर्स' के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया था, जिसके पास वह निर्माण भूखंड था, जहां 2021 से पानी जमा था। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले यह भूखंड 'लोटस ग्रीन्स' के पास था।
पुलिस ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मौत का कारण बनना) और 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
भाषा नोमान सुरेश
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