स्वाधीनता के बाद नेहरू के समय में पाश्चात्य असर वाली नीतियां बन रही थीं-अमित शाह
नोमान
- 21 Jan 2026, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
देहरादून, 20 जनवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि देश की स्वाधीनता के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय में पाश्चात्य विचारों से प्रभावित होकर नीतियां बनाई जा रही थीं लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इन पर 'यूटर्न' लगाने का काम तीव्र गति से चल रहा है ।
ऋषिकेश में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका 'कल्याण' के शताब्दी अंक का विमोचन करने के बाद शाह ने कहा कि इस पत्रिका ने देश में अंग्रेजों के समय से लेकर आजादी के बाद तक हर कालखंड में हिंदू संस्कृति और सनातन चेतना के दीप को जलाए रखा।
इस संबंध में शाह ने 'कल्याण' द्वारा अब तक निकाले गए विशेषांकों का उल्लेख किया और कहा, "हिंदू संस्कृति पर अंक 1950 में उस समय आया जब जवाहर लाल नेहरू जी के समय में पाश्चात्य असर से हमारे देश की नीतियां गढ़ी जा रही थीं। जब देश की शिक्षा नीति, विदेश नीति, रक्षा नीति, व्यापार नीति पश्चिम के विचारों से प्रभावित होकर बन रही थीं, उस वक्त कल्याण ने चुपचाप कुछ कहे बगैर लोगों के सामने यह अंक प्रकाशित किया।"
उन्होंने कहा कि इस अंक को निकालने के पीछे निश्चित रूप से विचार यही रहा होगा कि जब देश आजाद होकर अपनी नीतियां बना रहा है तो उनका मूल हमारी संस्कृति होनी चाहिए न कि पाश्चात्य विचार होना चाहिए।
शाह ने कहा, "लेकिन जब 'कल्याण' का शताब्दी वर्ष है तो इन (नीतियों) पर जो यूटर्न लगाना था, वह यूटर्न लगाने का काम तीव्र गति से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रहा है।"
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्यों को नीतियों के मूल में समाहित कर नीतियां बनायी जा रही हैं।
शाह ने कहा कि पिछले 11 साल के कार्यकाल में युवाओं में बड़ा गुणात्मक परिवर्तन आया है।
उन्होंने कहा कि आज देश में हिंदू संस्कृति और सनातन की ध्वजा फहरा रही है जहां साढ़े 500 साल बाद रामलला को भव्य राम मंदिर में स्थापित किया गया जबकि काशी विश्वनाथ का गलियारा आज पूरे देश को संदेश दे रहा है कि तोड़ने वालों से श्रृद्धा की ताकत कहीं बड़ी है ।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर को तोड़े हुए 1000 साल हो गए हैं और केंद्र सरकार पूरे वर्ष को 'सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष' के रूप में मनाने जा रही है ।
उन्होंने कहा कि मंदिर को 16 बार तोड़ा गया लेकिन उसे तोड़ने वाले कहीं गुम हो गए लेकिन मंदिर की ध्वजा आज भी फहरा रही है।
मंत्री ने महाकालेश्वर गलियारे, केदारनाथ धाम के पुनरूद्धार और बदरीनाथ महायोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश भर में 35 से ज्यादा तीर्थों की पुनर्जागृति और महिमामंडन पर विचार हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा, "हमारे देश के विभिन्न तीर्थस्थानों से उठाकर दुनिया भर में ले जायी गयी 642 से ज्यादा मूर्तियों को वापस लाकर उन्हीं स्थानों पर पुनर्स्थापित किया गया है।"
इससे पहले, शाह ने यहां पहुंचने के बाद लक्ष्मीनारायण मंदिर के दर्शन किए तथा गंगा पूजन किया ।
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