नवी मुंबई हवाई अड्डे पर नेटवर्क स्थापना मामले की ट्राई कर रहा जांचः चेयरमैन
रमण
- 21 Jan 2026, 05:29 PM
- Updated: 05:29 PM
नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई अदाणी समूह-समर्थित नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास दूरसंचार नेटवर्क तैनात करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को पेश आ रही मूल्य-निर्धारण संबंधी समस्या की जांच कर रहा है। एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों के निकाय सीओएआई ने इस मुद्दे पर नियामक से हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने बताया कि ट्राई ने 'सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (सीओएआई) से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है कि अतीत में दूरसंचार कंपनियों ने नेटवर्क स्थापित करने के लिए किन शर्तों और कीमतों पर समझौते किए थे।
लाहोटी ने कहा, "सीओएआई के पत्र में चार मुद्दे उठाए गए हैं। इनमें से तीन मार्ग-अधिकार से जुड़े हैं जबकि एक मामला मूल्य निर्धारण से संबंधित है। हमने सीओएआई से कुछ जानकारियां मांगी हैं। उनका अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।"
मार्ग-अधिकार के तहत किसी सार्वजनिक या निजी भूमि पर दूरसंचार टावर, केबल, पाइपलाइन या अन्य बुनियादी ढांचा बिछाने और संचालित करने की मंजूरी दी जाती है।
ट्राई प्रमुख ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले में नियामक को सरकार से किसी विशेष संदर्भ की जरूरत नहीं है और सीओएआई से मिले संदर्भ के आधार पर ही नियामक स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर सकता है।
दूरसंचार कंपनियों के निकाय ने दूरसंचार विभाग से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उसका आरोप है कि उसकी सदस्य कंपनियों ने हवाई अड्डा परिसर में निर्बाध 4जी एवं 5जी कनेक्टिविटी मुहैया कराने के लिए इन-बिल्डिंग सॉल्यूशंस (आईबीएस) जैसे नेटवर्क लगाने की मंजूरी मांगी थी, लेकिन नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनएमआईएएल) ने जरूरी मंजूरियां देने से इनकार कर दिया।
हालांकि, एनएमआईएएल ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि मोबाइल नेटवर्क के लिए आईबीएस अवसंरचना कई दौर की चर्चाओं के बाद स्थापित की जा चुकी है और सरकारी कंपनी बीएसएनएल इस प्रणाली के परीक्षण के उन्नत चरण में है।
उसने कहा कि किसी भी दूरसंचार कंपनी को हवाई अड्डे पर मार्ग-अधिकार देने से कभी भी मना नहीं किया गया है।
एनएमआईएएल ने कहा कि वह दूरसंचार कंपनियों के साथ निजी स्तर पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह की 'गुटबंदी' को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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