उन्नाव बलात्कार मामला : कुलदीप सेंगर की 10 साल की सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज
शफीक अविनाश
- 19 Jan 2026, 07:45 PM
- Updated: 07:45 PM
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की 10 साल की सजा को निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने कहा, ‘‘राहत देने के लिए कोई आधार नहीं है। सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज की जाती है।’’
न्यायाधीश ने कहा कि सेंगर ने हालांकि लंबा समय जेल में बिताया है, लेकिन देरी के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह इसलिए हुआ क्योंकि उसने अपनी सजा के खिलाफ कई अपील दायर की थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायालय इस बात से अवगत है कि अपीलकर्ता को साढ़े सात वर्षों से कैद में रहना पड़ा है और अपील की सुनवाई नहीं हो सकी... लेकिन अपील की सुनवाई में देरी के कारणों में से एक यह था कि अपीलकर्ता ने अंतरिम निलंबन, जमानत की अवधि बढ़ाने और सजा के नियमित निलंबन के लिए कई आवेदन दायर किए थे। अगर अपील के गुण-दोष पर तेजी से सुनवाई होती है, तो मकसद पूरा होगा।’’
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी के लिए सूचीबद्ध की।
बलात्कार पीड़िता ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ फोन पर बातचीत में अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि इस फैसले से उन्हें सुकून मिला है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अदालत के फैसले से बहुत खुश हूं। आज मेरे पिता की आत्मा को कुछ शांति मिली है। मैंने अभी तक अपने पिता की तेरहवीं की रस्में भी नहीं की हैं। जब तक उनके हत्यारों को मौत की सजा नहीं मिलती, उनकी आत्मा को सच्ची शांति नहीं मिलेगी।’’
न्याय के लिए संघर्ष करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए पीड़िता ने कहा कि उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न और उनके पिता की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई अतुल सिंह सेंगर और इस साजिश में संलिप्त सभी लोगों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं है... यह न्याय और सच्चाई की लड़ाई है, और मैं इसे अपनी आखिरी सांस तक जारी रखूंगी।’’
निचली अदालत ने 13 मार्च, 2020 को सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल कैद की सजा सुनाई थी और उसपर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अदालत ने कहा था कि एक परिवार के ‘‘इकलौते कमाने वाले’’ सदस्य की मौत के मामले में कोई नरमी नहीं दिखाई जा सकती।
अदालत ने बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में संलिप्तता के लिए सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य को भी 10 साल कैद की सजा सुनाई थी।
बलात्कार पीड़िता के पिता को सेंगर के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और नौ अप्रैल, 2018 को पुलिस की बर्बरता के कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।
सेंगर ने 2017 में नाबालिग लड़की का अपहरण किया था और उसके साथ बलात्कार किया था।
पीड़िता के पिता की मौत के मामले में निचली अदालत ने सेंगर को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत हत्या का दोषी नहीं ठहराया, लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषियों को गैर-इरादतन हत्या के लिए अधिकतम सजा सुनाई।
दुष्कर्म के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 को सेंगर को दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के फैसले के खिलाफ, साथ ही पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर की अपील उच्च न्यायालय में लंबित हैं।
उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को दुष्कर्म मामले में सेंगर की दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था।
इसके बाद, शीर्ष अदालत ने 29 दिसंबर 2025 को इस निलंबन पर रोक लगा दी थी।
भाषा
शफीक