महिलाओं के नेतृत्व वाले स्थानीय निकाय उच्च स्तर की पारदर्शिता, जवाबदेही प्रदर्शित करते हैं : हरिवंश
सुभाष प्रशांत
- 16 Jan 2026, 09:03 PM
- Updated: 09:03 PM
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने शुक्रवार को कहा कि अध्ययन और जमीनी अनुभव से पता चलता है कि महिलाओं के नेतृत्व वाले स्थानीय निकाय उच्च स्तर की पारदर्शिता, कड़ी निगरानी और मजबूत जवाबदेही प्रदर्शित करते हैं।
राष्ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के त्वरित सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समुदायों के साथ घनिष्ठ जुड़ाव के कारण, अक्सर धन की बर्बादी कम हो जाती है और सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचता है।
उन्होंने ‘भारत की त्रिस्तरीय शासन प्रणाली में महिलाओं के योगदान’ विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।
राज्यसभा के उपसभापति ने देश के त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक ढांचे में शासन में महिलाओं की भागीदारी के वास्तविक अनुभवों को भी साझा किया, जिसमें केंद्रीय स्तर पर संसद, राज्य विधानसभाएं और स्थानीय स्वशासन संस्थाएं शामिल हैं।
हरिवंश ने कहा कि यह ढांचा केंद्र, राज्यों और जमीनी स्तर की संस्थाओं के बीच ऊर्ध्वाधर शक्ति-साझाकरण पर आधारित है और महिलाओं को, विशेष रूप से स्थानीय स्तर पर, संवैधानिक और संस्थागत रूप से शामिल किए जाने के कारण वैश्विक महत्व प्राप्त कर चुका है।
उपसभापति ने यह भी कहा कि भारत का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं की भागीदारी लोकतांत्रिक वैधता को कैसे मजबूत करती है और शासन में सुधार लाती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का भारत का सफर इसकी सभ्यतागत संस्कृति में गहराई से निहित है, जहां विचार-विमर्श करने वाली सभाओं और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में ऐतिहासिक रूप से महिलाओं की सार्थक भागीदारी रही है।
भारत के संवैधानिक विकास का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कहा कि स्वतंत्रता से बहुत पहले, 1920 के दशक में ही कई प्रांतों में महिलाओं को मताधिकार प्राप्त हो गया था।
उन्होंने कहा कि 1950 में सार्वभौम वयस्क मताधिकार को अपनाकर भारत ने गणतंत्र की स्थापना से ही राजनीतिक समानता सुनिश्चित करके एक साहसिक और प्रगतिशील कदम उठाया।
उन्होंने कहा कि कई महिलाओं के लिए, विशेषकर ग्रामीण और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों की महिलाओं के लिए, स्थानीय निकाय सार्वजनिक जीवन में प्रवेश की पहली सीढ़ी होते हैं।
हरिवंश ने इस बात पर भी जोर दिया कि अध्ययन और जमीनी अनुभव से पता चलता है कि महिलाओं के नेतृत्व वाले स्थानीय निकायों में पारदर्शिता, कड़ी निगरानी और जवाबदेही का स्तर अधिक होता है।
उन्होंने कहा कि शासन के तीनों स्तरों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के साथ, जोर धीरे-धीरे महिला विकास से हटकर महिला-नेतृत्व वाले विकास पर केंद्रित हो गया है।
भाषा सुभाष